पिछले वर्ष सितंबर में कश्मीर को मिले बाढ़ के जख्मों पर मरहम लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। कश्मीर संभाग के सेब उत्पादकों ने इस साल सेब की अधिक फसल लगाने का निर्णय लिया है।
इससे वह अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करेंगे और पटरी से उतरी आर्थिक स्थिति को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास करेंगे।
मार्च के मध्य में सेब की फसल लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। सेब के साथ कुछ अन्य फसलों की रोपाई भी की जाएगी। उत्पादकों ने नई सरकार से भी उम्मीद लगाई है कि उनके इस प्रयास को सरकार की तरफ से सहयोग मिले।
शोपियां के सेब उत्पादक एसोसिएशन के प्रधान मोहम्मद अमीन मीर ने अमर उजाला को इसकी जानकारी दी। मीर का कहना है कि पिछले साल सितंबर माह में सेब सहित अन्य फसलों का 75 फीसदी नुकसान हुआ। नाशपाती की फसल तैयार होने से पहले ही नष्ट हो गई।
कश्मीर की आर्थिक स्थिति यहां के सेब कारोबार पर निर्भर करती है। पिछले वर्ष बाढ़ के कारण यह स्थिति बिगड़ गई और करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस वर्ष कोशिश है कि इस नुकसान की भरपाई हो सके।
मार्च के मध्य में सेब, आड़ू, लीची, स्ट्राबरी, कीवी और बादाम की प्लांटेशन शुरू की जाएगी और हर वर्ष की तुलना में 20 से 30 फीसदी प्लांटेशन करेंगे, ताकि फसल अधिक हो सके।
कश्मीर संभाग के शोपियां, बारामूला, श्रीनगर, कुलगाम, पहलगाम, सहित अन्य जिलों में करीब पांच लाख हेक्टेयर पर सेब और अन्य फलों की प्लांटेशन की जाएगी।