जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कब कराए जाएंगे। यह सवाल मंगलवार को लोकसभा में गूंजा। विपक्षी सदस्यों ने सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए समयसीमा की मांग की। विपक्षी नेताओं ने जल्द से जल्द चुनाव कराने का आग्रह किया।
जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पर बहस में भाग लेते हुए नेशनल कांफ्रेंस के सासंद हसनैन मसूदी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में जल्द चुनाव कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करने से पहले केंद्र सरकार को चुनाव पर निर्णय लेना चाहिए था। शीर्ष अदालत ने दिसंबर में अनुच्छेद 370 मामले में फैसले के दौरान चुनाव आयोग से इस साल सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने को कहा है। मसूदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि उनकी सरकार बड़े फैसले लेगी। मसूदी ने कहा कि अन्य बड़े फैसले लेने से पहले केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराए जाने चाहिए।
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव हुए थे। बहस में भाग लेते हुए, टीएमसी नेता सौगत रॉय ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का जिक्र किया और जम्मू-कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव की वकालत की।
5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जम्मू और कश्मीर को विधान सभा के प्रावधान के साथ केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। वर्तमान में यूटी केंद्रीय शासन के अधीन है। राकांपा की सुप्रिया सुले ने विधानसभा चुनाव कराने और जम्मू-कश्मीर के लोगों को राज्य का दर्जा देने पर सरकार से एक समयसीमा तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तारीख पर फैसला करेगा, लेकिन सरकार कम से कम लोकतांत्रिक अभ्यास आयोजित करने के लिए एक अस्थायी समयसीमा दे सकती है।
जम्मू से भाजपा सदस्य जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर स्थानीय निकाय कानून (संशोधन) विधेयक केंद्र शासित प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए न्याय सुनिश्चित करेगा। वाईएसआरसीपी की सांसद चिंता अनुराधा ने कहा कि यह एक प्रगतिशील कानून है और इससे पंचायतों सहित स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
विधेयक को चर्चा के लिए पेश करते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक जम्मू-कश्मीर में ओबीसी को न्याय सुनिश्चित करेगा। जम्मू-कश्मीर में ओबीसी को पहले नजरअंदाज किया जा रहा था। अब उन्हें विकास के राह पर आगे ले जा रहा है।