सरहद भी दोस्ती के अटूट बंधन को तोड़ नहीं पाई। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तीन युद्ध भी दो दोस्त परिवारों के दिलों के बीच विभाजन रेखा खींचने में विफल रहे।
भारत और पाकिस्तान जब अपनी स्वतंत्रता का जश्न इस सप्ताह मनाने जा रहे हैं तब दोस्ती की यह बेमिसाल कहानी तब ताजा हो गई जब टंडन और मुगल परिवार फिर मिले।
मुगल परिवार जब कारवां-ए-अमन बस सेवा से पहुंचा तो टंडन परिवार के सदस्यों की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। दोनों परिवारों के बीच दोस्ती की यह कहानी देश विभाजन से पहले मुजफ्फराबाद में शुरू हुई थी।