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खून' के लिए एक दूसरे का मुंह ताकते हैं अस्पताल

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रियासत में लोगों को आधुनिक चिकित्सा मुहैया करवाने के लिए नए अस्पतालों की इमारतों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए खून की उपलब्धता बढ़ाने को ब्लड बैंकों पर कुछ खास नहीं हो पाया है।
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शहर के ही कई अस्पताल खून के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर हैं। इन अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज से ही काम चलाया जा रहा है। जिसमें कुछ यूनिट खून ही रिजर्व रहता है।

एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, कार्डियोलाजी, सीटीवीएस सहित कई महत्वपूर्ण यूनिट काम कर रहे हैं। यहां विभिन्न यूनिटों में रोजाना कई सर्जरी भी हो रही हैं।
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सुपर स्पेशलिटी में भी सिर्फ ब्लड स्टोरेज की सुविधा

डायलेसिस में भी मरीजों को खून की जरूरत पड़ती है, लेकिन अभी तक अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने के लिए कुछ खास नहीं हो पाया है। अस्पताल में ब्लड स्टोरेज सेंटर में कुछ यूनिट खून ही रिजर्व रहता है।

जिसमें अधिकांश मामलों में तीमारदारों को जीएमसी या एसएमजीएस अस्पताल से खून लाना पड़ता है। यही हाल शहर के दूसरे बड़े अस्पताल सरवाल का भी है। यहां भी ब्लड बैंक न होने के कारण अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को खून के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

इस प्रक्रिया में तीमारदारों को दूसरी जगह से खून लाने में काफी दिक्कतें होती हैं। कई बार जागरूकता के अभाव में देरी होने के कारण तीमारदारों के पास लिया गया खून बेकार हो जाता है।

यह परेशानी एक जगह से दूसरी जगह पर जाने और आने में होती है। इन अस्पतालों में ब्लड बैंक के लिए कई बार घोषणाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई खास प्रयास नहीं किया गया।
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