भल्ला का कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है। केंद्र शासित प्रदेश होने से जम्मू-कश्मीर में भी केंद्र की ही सरकार है। भाजपा पिछले कई सालों से दरबार मूव की परंपरा को बंद करने की बात कर रही है, लेकिन उसके शासनकाल में तो केवल साढ़े तीन महीने के लिए दरबार मूव हो रहा है और करोड़ों की राशि खर्च हो रही है। भाजपा को इसका जवाब जनता को देना चाहिए।
दस महीने बाद भी दरबार पर नीति निर्धारित नहीं कर पाई सरकार
केंद्र शासित प्रदेश बने आठ महीने बीतने और अनुच्छेद 370 को खत्म हुए दस महीने बीत जाने के बावजूद भी न तो केंद्र सरकार और न ही प्रदेश प्रशासन दरबार मूव की परंपरा पर कोई नीति निर्धारित कर पाया है। कोरोना काल में दरबार मूव की पंरपरा को जारी रखने का नागरिक सचिवालय के कर्मचारी भी विरोध कर चुके हैं। इसके बावजूद दरबार मूव किया जा रहा है।
उधर प्रदेश में दरबार मूव के प्रत्येक कर्मचारी को एडवांस में 25 हजार रुपये विशेष मूव टूर अलाउंस के रूप में मिलेंगे। उपराज्यपाल के निर्देश पर सामान्य प्रशासनिक विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं।
बता दें, पिछले साल भी मूव टूर अलाउंस 25 हजार ही मिला था लेकिन कोरोना संकट में इस अलाउंस से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी। कोरोना वायरस के चलते इस साल चार मई को श्रीनगर में आधिकारिक तौर पर दरबार मूव नहीं हुआ था।
प्रदेश सरकार ने अब छह जुलाई से श्रीनगर में नागरिक सचिवालय सहित अन्य दरबार मूव के कार्यालयों को आधिकारिक तौर पर खोलने का फैसला लिया है। दरबार मूव के तहत आने वाले कर्मचारियों की संख्या करीब 10 हजार है लेकिन ये अलाउंस सिर्फ उन कर्मचारियों को ही मिलेगा जो दरबार के साथ श्रीनगर मूव करेंगे। इससे पहले सरकार ने कर्मचारियों को सुविधा दी है कि जम्मू आधारित कर्मचारी जम्मू से व कश्मीर आधारित कर्मचारी श्रीनगर से काम कर सकते हैं।