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जम्मू-कश्मीरः दरबार मूव के फैसले से नाखुश भाजपा, कांग्रेस ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए

Sat, 13 Jun 2020 02:29 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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दरबार मूव व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला, फाइल
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सिर्फ साढ़े तीन महीने के लिए दरबार को श्रीनगर में शिफ्ट करने के प्रदेश प्रशासन के फैसले से भाजपा नाखुश है। उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू से लेकर केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष भाजपा इस मसले पर अपनी नाराजगी को जताएगी और दरबार मूव की परंपरा को बंद करने का सुझाव देगी। वहीं, दरबार मूव पर सिर्फ तीन महीनों के लिए करोड़ों की राशि खर्च करने के मामले पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं।

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दरबार मूव में तय समय से करीब दो महीने की देरी पर छह जुलाई 2020 से प्रदेश प्रशासन ने श्रीनगर सचिवालय सहित अन्य दरबार मूव के कार्यालयों से आधिकारिक तौर पर काम शुरू करने का आदेश जारी किया है। कोरोना महामारी के कारण हालांकि जम्मू आधारित कर्मचारियों को जम्मू से काम करने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद करोड़ों की राशि दरबार मूव पर खर्च होना तय है।

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना के अनुसार भाजपा भी दरबार मूव के पक्ष में नहीं है। पार्टी चाहती है कि आगे से जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव की परंपरा पूरी तरह से बंद हो जाए। जम्मू हो या श्रीनगर दोनों जगह पर सचिवालय पर अन्य ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में 12 महीने दोनों संभागों में दरबार सजा रहना चाहिए।

भाजपा उपराज्यपाल से जल्द मिलकर उनके समक्ष अपना पक्ष साफ कर देगी। जम्मू हो या कश्मीर दोनों क्षेत्रों के लोगों की भलाई भी दरबार मूव की परंपरा के बंद होने में ही है। वहीं कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रमण भल्ला ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है।

भल्ला का कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है। केंद्र शासित प्रदेश होने से जम्मू-कश्मीर में भी केंद्र की ही सरकार है। भाजपा पिछले कई सालों से दरबार मूव की परंपरा को बंद करने की बात कर रही है, लेकिन उसके शासनकाल में तो केवल साढ़े तीन महीने के लिए दरबार मूव हो रहा है और करोड़ों की राशि खर्च हो रही है। भाजपा को इसका जवाब जनता को देना चाहिए।

दस महीने बाद भी दरबार पर नीति निर्धारित नहीं कर पाई सरकार
केंद्र शासित प्रदेश बने आठ महीने बीतने और अनुच्छेद 370 को खत्म हुए दस महीने बीत जाने के बावजूद भी न तो केंद्र सरकार और न ही प्रदेश प्रशासन दरबार मूव की परंपरा पर कोई नीति निर्धारित कर पाया है। कोरोना काल में दरबार मूव की पंरपरा को जारी रखने का नागरिक सचिवालय के कर्मचारी भी विरोध कर चुके हैं। इसके बावजूद दरबार मूव किया जा रहा है।

 
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उधर प्रदेश में दरबार मूव के प्रत्येक कर्मचारी को एडवांस में 25 हजार रुपये विशेष मूव टूर अलाउंस के रूप में मिलेंगे। उपराज्यपाल के निर्देश पर सामान्य प्रशासनिक विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा ने शुक्रवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

बता दें, पिछले साल भी मूव टूर अलाउंस 25 हजार ही मिला था लेकिन कोरोना संकट में इस अलाउंस से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी। कोरोना वायरस के चलते इस साल चार मई को श्रीनगर में आधिकारिक तौर पर दरबार मूव नहीं हुआ था।

प्रदेश सरकार ने अब छह जुलाई से श्रीनगर में नागरिक सचिवालय सहित अन्य दरबार मूव के कार्यालयों को आधिकारिक तौर पर खोलने का फैसला लिया है। दरबार मूव के तहत आने वाले कर्मचारियों की संख्या करीब 10 हजार है लेकिन ये अलाउंस सिर्फ उन कर्मचारियों को ही मिलेगा जो दरबार के साथ श्रीनगर मूव करेंगे। इससे पहले सरकार ने कर्मचारियों को सुविधा दी है कि जम्मू आधारित कर्मचारी जम्मू से व कश्मीर आधारित कर्मचारी श्रीनगर से काम कर सकते हैं।
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