भाजपा ने मिशन 44 प्लस की उलझे गणित को सुलझा लिया है। अब गेंद नेशनल कांफ्रेंस के पाले में है। कार्यवाहक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पार्टी के प्रमुख नेताओं से विचार विमर्श और विधायक दल की बैठक के बाद समर्थन के फैसले का ऐलान कर सकते हैं।
इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नवनिर्वाचित विधायकों का मन टटोला है। विधायक दल ने नई सरकार के लिए प्रयासों पर सहमति जताई है। ताजा घटनाक्रम के बाद कांग्रेस का गणित गड़बड़ा गया है। पीपुल्स कांफ्रेंस और निर्दलियों विधायकों का भाजपा को समर्थन के बाद पीडीपी-कांग्रेस का संभावित गठबंधन अर्थहीन होता दिखता है।
भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक जेटली और अरुण सिंह ने विधायकों से बारी-बारी से नेता और नई सरकार के गठन के बारे में पूछा। चूंकि भाजपा चुनाव प्रचार के दौरान नेकां पर आक्रामक रही है और प्रधानमंत्री ने हर रैली में बाप-बेटे (फारूक-उमर) और बाप-बेटी(मुफ्ती-महबूबा) की सरकार पर हमला बोला है, इसलिए सार्वजनिक रूप से किसी गठबंधन के ऐलान से पहले सर्वानुमति दिखाने की कवायद पूरी की जा रही है।
उमर के सामने प्रस्ताव रखा
जेटली ने भाजपा के वीटो पावर का जिक्र कर नेकां और पीडीपी को 25 विधायकों और निर्दलियों के समर्थन की ताकत का अहसास करा दिया है। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत पीपुल्स कांफ्रेंस और पीडीएफ के अलावा तीन निर्दलीय विधायक हैं।
भाजपा सूत्रों की मानें तो भाजपा आलाकमान ने उमर के सामने प्रस्ताव रख दिया है। इसके तहत भाजपा के सीएम और नेकां के डिप्टी सीएम की बात है। उमर का राज्यसभा में जगह देकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में लाने का भी प्रस्ताव है।
इससे पहले नेकां को उम्मीद थी कि भाजपा 2002 के कांग्रेस-पीडीपी गठबंधन का अनुसरण करते हुए उमर के सीएम पद का आफर करेगी। नेकां को इस मोर्चे पर निराशा हाथ लगी है।
बारह साल पहले कांग्रेस ने 21 विधायक रहने के बावजूद 16 विधायक वाले पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद को सीएम बनाया था। भाजपा किसी भी कीमत पर अपना सीएम चाहती है।
निर्दलीय भाजपा के पक्ष में
पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन और बशीर अहमद ने भाजपा के समर्थन पहले घोषणा कर रखी है। निर्दलीय पवन गुप्ता भाजपा के बागी हैं लेकिन मोदी को अपना नेता मानते हैं। पीडीएफ के हकीम यासिन ने भाजपा को समर्थन दिया है। इंजीनियर रशीद भी भाजपा के पक्ष में हैं। झंस्कार के विधायक बशीर रिजवी से राम माधव की बातचीत चल रही है।
बाजी हाथ से फिसलते देख पीडीपी सक्रिय हो गई है। पीडीपी नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग ने भाजपा-पीडीपी सरकार की वकालत कर पहल की है। उन्होंने पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लिए समय मांगा है। पीडीपी ने सत्ता के समान कार्यकाल बंटवारे का कांग्रेस वाला पुराना फार्मूला बनाया है।
रियासत कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज का कहना है कि कि सत्ता के भूखे लोगों की जमात जनादेश से खिलवाड़ का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि पीडीपी को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए।