भाजपा ने मिशन 44 प्लस को अब मिशन 50 में बदल दिया है। पार्टी जम्मू, कश्मीर और लद्दाख तीनों संभागों में अधिक से अधिक सीटें हासिल करने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। लिहाजा, तीनों संभागों के लिए अलग-अलग रणनीति पर काम हो रहा है। जम्मू में भाजपा का पहले से जनाधार रहा है लेकिन कश्मीर में नए जनाधार की तलाश की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल मांगे मोर की बात करते रहे हैं इसलिए कश्मीर में टारगेट बढ़ाया गया है। लद्दाख और कश्मीर में मोदी के विकास पुरुष की छवि को भुनाने पर जोर है। इस कारण कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अफस्पा की वापसी का मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इन दोनों मुद्दों पर कश्मीरियों का विरोध रहा है। वैसे जम्मू में अनुच्छेद 370 का मुद्दा बाद में उठाया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव के नतीजे ने भाजपा को उत्साहित किया और पार्टी ने जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने की रणनीति तय की। लोकसभा चुनाव में तीन सीटें और 32.4 प्रतिशत वोट हासिल कर भाजपा रियासत में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर चुकी है। पीडीपी ने भी लोस की तीन सीटें हासिल की थीं, लेकिन उसे सिर्फ 20.5 प्रतिशत वोट ही मिले। इसी तरह शून्य स्कोर करने वाली कांग्रेस को 22.9 और नेशनल कांफ्रेंस को 11.1 फीसदी वोट हासिल हुए थे।
संवेदनशील मुद्दों से बच रही है भाजपा
इस बार विधानसभा चुनाव में मतदान तिथियों का गणित भाजपा को अपने पक्ष में लग रहा है। कश्मीर की सभी सीटों पर चुनाव चौथे चरण में 14 दिसम्बर तक समाप्त हो जाएंगे जबकि जम्मू संभाग की सभी सीटों पर चुनाव पांचवें चरण में 20 दिसंबर को है।
कश्मीर के चुनाव तक भाजपा अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर नरमी बरतने की रणनीति पर चल रही है। बाद में अंतिम चरण के मतदान में यह मुद्दा गरमाया जा सकता है।
पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि पार्टी ने अनुच्छेद 370 के मुद्दे को छोड़ा नहीं है। दूसरी ओर, रियासत कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज कहते हैं कि भाजपा कश्मीर में आरएसएस का एजेंडा थोप रही है।
कश्मीर में सेना और अफस्पा की वापसी का मुद्दा प्रमुख रहा है। भाजपा के कश्मीरी नेता भी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के विरोध में हैं। इसलिए पार्टी इन संवेदनशील मुद्दों पर मुखर होने से बचना चाह रही है।
अफस्पा पर भाजपा हुई खामोशी
भाजपा सेना और अफस्पा हटाने के मुद्दे पर खामोशी ओढ़ रही है। घोषणा पत्र में अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराए जाने की बात शामिल हो सकती है। भाजपा ने पहले सभी 87 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी लेकिन अब यह आंकड़ा 72 से अधिक नहीं होगा।
अघोषित गठबंधन के तहत सज्जाद लोन के पीपुल्स कांफ्रेंस के लिए सीटें छोड़ी जा रहीं हैं। अन्य छोटे दलों से चुनाव बाद गठबंधन की रणनीति के तहत तालमेल किया गया है।
जम्मू संभाग में रिफ्यूजियों का मुद्दा एजेंडे में ऊपर है। इसके अलावा इस संभाग की उपेक्षा को भी भुनाने की कोशिश होगी।