रियासती चुनाव के लिए मतदान शुरू होने में अब दस दिन शेष रह गए हैं। जनता को विभिन्न पार्टियों के दृष्टिकोण का पता नहीं चल पाया है कि वे चुनाव जीतने के बाद रियासत के लिए क्या करेंगे। प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, नेकां, पीडीपी और पैंथर्स के घोषणा पत्र का जनता को इंतजार है, ताकि असमंजस की स्थिति खत्म हो सके।
हालांकि, सभी दलों की ओर से रियासत के विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता स्पष्ट दृष्टिकोण चाहती है। मसलन अनुच्छेद 370 तथा अलगाववाद पर भाजपा का नजरिया? विकास, बेरोजगारी दूर करने और युवाओं के कल्याण, किसानों तथा समाज के अन्य वर्गों के लिए पार्टियों की क्या नीतियां होंगी?
हर वक्त दहशत में जी रहे सीमांत ग्रामीणों में पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित होने पर सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए जमीन तथा बच्चों की पढ़ाई के नुकसान के स्थायी हल के लिए उठाए जाने वाले कदम? लोगों का कहना है कि घोषणा पत्र से कम से कम यह तो पता चल सकेगा कि पार्टियां कितना उनके हित में काम करने वाली हैं और कौन सी पार्टी उनकी हितैषी है।
इस आधार पर सत्ता की चाबी सौंपने के बारे में राय बनाई जा सके। उनका यह भी कहना है कि पिछले चुनाव में पीडीपी ने सेल्फ रूल, नेकां ने विकास, कांग्रेस ने तीनों खित्तों में क्षेत्रीय परिषद (रीजनल काउंसिल) की बात कही थी, लेकिन इनका क्या हुआ, इस बारे में भी जवाब चाहिए।