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RS चुनाव में कांग्रेस को हराने के लिए BJP-PDP एकजुट

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को फिर से ऊपरी सदन में पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। भाजपा और पीडीपी ने एकजुट होकर आजाद को घेरने की व्यूहरचना की है। नेशनल कांफ्रेंस के समर्थन के बावजूद आजाद की मुश्किलें अभी कम नहीं हुईं हैं।
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सारा दारोमदार निर्दलीय और अन्य विधायकों पर निर्भर हो गया है। नतीजतन कांग्रेस निर्दलियों का समर्थन हासिल करने की जीतोड़ कोशिश में जुटी है। उधर, पीडीपी और भाजपा ने भी निर्दलीय विधायकों से तार जोड़ लिया है। लिहाजा, मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की भी निर्दलीय विधायकों से फोन पर बातचीत हुई है। राम माधव लगातार संपर्क में हैं और पीडीपी के मुफ्ती व्यूहरचना कर निजी दौरे पर मुंबई रवाना हो गए हैं। भाजपा विधायकों के साथ राम माधव और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की बैठकें हो चुकीं हैं।
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PDP विधायकों को भाजपा के पक्ष में वोट डालने के निर्देश

पीडीपी ने चुनाव नतीजों के बाद पहली बार शनिवार को विधायक दल की बैठक में रणनीति को अंतिम रूप दिया। अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने विधायकों को भाजपा के पक्ष में वोट डालने के निर्देश दिए। राज्यसभा की चार सीटों के लिए 7 फरवरी को मतदान होना तय है।

इन सीटों के लिए आजाद समेत सात उम्मीदवार मैदान में हैं। तीन अधिसूचनाओं के तहत चार सीटों के लिए तीन बार वोट पड़ेंगे। पीडीपी और भाजपा ने युक्तिसंगत मतदान के जरिए सभी चार सीटों पर कब्जे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

भाजपा के पास 25 और पीडीपी के पास 28 सीटें हैं। पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन समेत दो विधायकों और निर्दलीय पवन गुप्ता का वोट भाजपा को मिलना तय है। इस तरह भाजपा-पीडीपी का आंकड़ा 56 तक आसानी से पहुंच रहा है।

ऐसे होगा वोटों का बंटबारा

दूसरी और आजाद के साथ कांग्रेस के 12 और नेशनल कांफ्रेंस के 15 वोट हैं। यह जोड़ 27 पर सिमटा है। निर्दलीय बकीर रिजवी कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस दोनों पार्टियों में रह चुके हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में उन्हें नेकां का समर्थन प्राप्त था।

उन्होंने सरकार को समर्थन और राज्यसभा में मतदान पर सलाह के लिए अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख लोगों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी ने उन्हें पीडीपी के साथ जाने की सलाह दी है। रिजवी इस सलाह को मानते हैं तो भाजपा-पीडीपी का एक वोट बढ़ जाएगा। और उनका गठबंधन 57 के वोट बैंक पर पहुंच सकता है।

सीपीएम विधायक एम वाई तारिगामी का वोट भाजपा के विरोध में आजाद को मिलना तय है। ताजा समीकरण में पीडीएफ के मोहम्मद यासिंन और निर्दलीय इंजीनियर रशीद का वोट महत्वपूर्ण हो गया है। तारिगामी ने यासिन और रशीद के साथ मोर्चा बनाने की पहल की है।
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यासिन और रशीद का वोट पलट सकता है बाजी

यह मोर्चा भाजपा के विरोध में रहा है, लेकिन रशीद और यासिन ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। रशीद भाजपा विरोधी हैं, लेकिन, पीडीपी के ज्यादा करीब रहे हैं। उन्होंने भी विधानसभा के प्रमुख लोगों की कमेटी गठित कर सलाह मांगी है। भाजपा-पीडीपी गठबंधन को सिर्फ चौथी सीट पर ही खतरा है।

तीन सीटें इस गठबंधन की झोली में आसानी से जाती दिखती है। इसलिए चतुराई से चौथी सीट के लिए पीडीपी प्रत्याशी को आगे किया गया है। रशीद और यासिन के वोट भाजपा को नहीं मिल सकते, लेकिन, दोनों विधायकों को पीडीपी से कोई परहेज नहीं है।

यह गेम सफल होता है तो भाजपा-पीडीपी के पास 59 वोट होंगे। इस तरह तीसरी सीट 30 वोट से जीतने बाद के भी 29 वोट बचेंगे और आजाद के पास सिर्फ 28 वोट रह जाएंगे। इस स्थिति से बचने के लिए आजाद ने विधायक रशीद और यासिन से संपर्क किया है।
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