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बड़ी चतुराई से 370 से किनारा कर गई भाजपा?

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जम्मू कश्मीर चुनावों में जी जान से जुटी भाजपा ने कश्मीर फतह के लिए अब अपने पुराने और विवादित मुद्दों को चुपचाप किनारे कर दिया है। यही कारण है कि चुनावों से पूर्व अनुच्छेद 370 को लेकर बहस की पुरजोर वकालत करने वाली पार्टी अब इसका नाम लेने को भी तैयार नहीं है।
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अनुच्छेद 370 को लेकर भाजपा नेताओं के बदले रुख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले चरण के चुनावों से पूर्व घाटी में रैली करने वाले भाजपा के तीनों शीर्ष नेताओं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिहं ने एक बार भी अपने भाषण में अनुच्छेद 370 का जिक्र नहीं किया।

ऐसे में साफ है कि भाजपा ने इस संवेदनशील मुद्दे को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल लिया है। भाजपा को डर है कि इस मुद्दे को छेड़ते ही उसका सारा बना बनाया खेल बिगड़ सकता है और विपक्षी दलों को भी बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल जाएगा।
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मोदी, शाह, राजनाथ ने भाषणों में नहीं किया जिक्र

370 के मुद्दे पर पर भाजपा के परहेज का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केन्द्रीय नेतृत्व तो छोड़ दो स्‍थानीय नेता भी इसका नाम लेने को तैयार नहीं हैं। प्रदेश अध्यक्ष और सांसद जुगल किशोर प्रचार के दौरान एक बार भी भाषणों में 370 का जिक्र नहीं करते।

लोकसभा चुनाव के बाद केन्द्र में मंत्री पद पाने वाले स्‍थानीय सांसद डा. जितेन्द्र ने 370 को लेकर बहस की वकालत की थी, लेकिन आज उन्होंने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। पार्टी सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनावों में पार्टी के घोषणा-पत्र से भी इस मुद्दे की छुट्टी हो सकती है।

अभी तक मेनीफेस्टो जारी न होने के पीछे भी यह भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पार्टी नेता नहीं चाहते कि मेनीफेस्टो में 370 का जिक्र कर बिना बात कोई टेंशन मोल ली जाए। हालांकि इस बात की पूरी संभावना है कि अंतिम चरण में पार्टी इस मुद्दे को फिर उठा सकती है।
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उम्‍मीदवारों के तेवरों ने बदला पार्टी का रुख

कश्मीर से 370 हटाने के मुद्दे पर भाजपा का ठंडा रुख बिना वजह नहीं है, इसके पीछे उसके मुस्लिम उम्‍मीदवारों का सख्त रुख भी छिपा है। पार्टी को चिंता है कि अगर इस मुद्दे को छेड़ा गया तो बगावत की‌ स्थिति भी बन सकती है।

श्रीनगर से भाजपा की प्रमुख उम्‍मीद हिना भट तो अनुच्छेद 370 हटाने पर खुलकर बंदूक उठाने की बात भी कह चुकी हैं। पार्टी को ऐसी ही आशंका दूसरे उम्‍मीदवारों से भी हैं। ऐसे में पार्टी के पास सिवाय इस मुद्दे से किनारा करने के कोई विकल्प भी नहीं था।

अनुच्छेद 370 के मुद्दे को लेकर कश्मीर की आम जनता भी भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई है, कश्मीर में आम आदमी आज भी 370 को अपनी पहचान से जोड़कर देखता है, ऐसे में भाजपा ने चुपचाप इस संवेदनशील मुद्दे से खुद को किनारे कर लिया।
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