पूर्व मुख्यमंत्री तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि केंद्र की ओर से जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध प्रतिशोध की कार्रवाई है। इसके नतीजे खतरनाक होंगे। केंद्र से जम्मू-कश्मीर को जेल में तब्दील नहीं करने को कहा। कहा कि आप एक विचारधारा को कैद नहीं कर सकते हैं। हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं और प्रजातंत्र में विचारों की लड़ाई होती है।
अगर आपके पास एक बेहतर विचार है इस पर लड़ाई हो, लेकिन जम्मू कश्मीर को जेल में मत बदलिए। जमात के युवकों और नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद राज्य में, खासतौर पर घाटी में प्रतिशोध का माहौल है। यह एक सामाजिक और राजनीतिक संगठन है। इसकी एक विचारधारा है और वह नहीं समझती कि संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर एक विचारधारा को कैद किया जा सकता है।
पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कहा कि देश में लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने की घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि कश्मीर में गरीबों की मदद करने वाले एक सामाजिक संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया। कहा कि देश में आपके पास शिवसेना, आरएसएस हैं जिन्होंने एक तरह के मांस खाने के आधार पर लोगों की पीट-पीट कर हत्या की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बहरहाल, एक संगठन जो गरीबों की मदद करता है और स्कूल चलाता है उसे प्रतिबंधित कर दिया गया और उसके कार्यकर्ताओं को जेल में रखा गया है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। इसके गंभीर नतीजे होंगे।
उन्होंने कहा कि हमने भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार में भाजपा को वह नहीं करने दिया जो वह अब कर रही है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें अब कोई रोकने वाला नहीं है। जब एक कश्मीरी को पीटा जाता है तो लोग ताली बजाते हैं और खुश होते हैं। संगठन की ओर से चलाए जा रहे स्कूलों समेत जमात नेताओं की संपत्ति को सील करने के बारे में पूछने पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा नहीं होना चाहिए था।
यह स्कूल गरीबों को शिक्षा मुहैया करा रहे थे। उनके छात्र गुणी हैं। इन स्कूलों पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह सब छात्र कहां जाएंगे। वे हमारे भविष्य के साथ खेल रहे हैं जो बहुत गलत है। उन्हें इसके बजाए आरएसएस शाखाओं पर प्रतिबंध लगाना चाहिए जहां तलवारें दिखाई जाती हैं। कोई भी जमाती तलवार नहीं रखता है।
हुर्रियत (एम) प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक की संपत्तियों पर हाल में एनआईए की छापेमारी पर कहा कि केंद्र चाहता है कि हर कश्मीरी उस सोच की कीमत चुकाए जो उसके दिमाग में है। वह छापेमारी की निंदा करती हैं। आखिरकार वह जम्मू कश्मीर के धार्मिक प्रमुख हैं और उनकी लोगों में इज्जत है। यह भी प्रतिशोध की कार्रवाई है।