बोर्ड को जियारतों के दौरान प्रभावशाली लोगों, विशेष रूप से राजनीतिक नेताओं को खुश करने के लिए पगड़ी बांधने की शिकायतें मिल रही हैं।वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अंद्राबी ने मामले को गंभीरता से लिया है।
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड ने प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर राजनीतिक नेताओं की दस्तारबंदी पर रोक लगा दी है। यह आदेश सोमवार को वक्फ बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मोहिउद्दीन ने जारी किया। वक्फ बोर्ड पूरे प्रदेश में प्रमुख मजारों और मस्जिदों का प्रबंध देखता है।
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यह आदेश नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और पूर्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की ओर से धार्मिक स्थलों का दौरा करने व वहां दस्तार बंदी किए जाने के कुछ दिनों बाद आया है। आदेश में कहा गया है कि बोर्ड को जियारतों के दौरान प्रभावशाली लोगों, विशेष रूप से राजनीतिक नेताओं को खुश करने के लिए पगड़ी बांधने की शिकायतें मिल रही हैं।
नेताओं को धार्मिक स्थलों पर आमंत्रित किया जाना जारी है और उनकी दस्तारबंदी को धार्मिक स्थलों पर राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए पार्टी की संबद्धता के आधार पर किया जाता है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. द्रख्शां अंद्राबी ने मामले को गंभीरता से लिया है।
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बोर्ड का मानना है कि जियारत, खानकाह, मस्जिद, दारुल उलूम जैसे धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल केवल धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। ऐसे स्थानों को केवल धार्मिक क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों के लिए लोगों को सम्मानित करने के लिए ही किया जा सकता है। इसलिए अब वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों द्वारा दस्तारबंदी पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी।
धार्मिक उपलब्धियों पर अनुमति लेनी होगी
हालांकि धार्मिक उपलब्धियों के लिए लोगों की दस्तारबंदी को केंद्रीय कार्यालय वक्फ बोर्ड की अनुमति ली जा सकती है। सभी प्रशासकों और कार्यकारी अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है। नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।