राजोरी के बड्डाल में 17 मौतों पर रहस्य बरकरार है। अब तक की रिपोर्टों में दो बच्चों के शरीर में न्यूरो टॉक्सिन मिलने का खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार जिन दो बच्चों में न्यूरो टॉक्सिन पाया गया है, उनकी मौत सांप के जहर से नहीं बल्कि केमिकलयुक्त जहरीले पदार्थ के सेवन से होने की आशंका अधिक है। इसके अलावा अन्य बच्चों के विसरा सैंपल को डीआरडीओ ग्वालियर और केंद्रीय एफएसएल में भेजा गया है।
वहां से रिपोर्ट आना बाकी है।एक स्वास्थ्य उच्चाधिकारी ने बताया कि केमिकलयुक्त जहर बच्चों के शरीर में आकस्मिक गया या साजिश के तहत खिलाया गया, यह जांच का विषय है। बड्डाल में अंतिम परिवार से जिन छह बच्चों की मौत हुई है, उन्होंने एक जगह सामूहिक भोज में खाना खाया था। अगर उस खाने में किसी तरह की मिलावट होती तो अन्य लोगों की भी मौत होती। सिर्फ इसी परिवार के ही बच्चे मरे हैं। टॉक्सिन किन स्रोतों से आया इसके कई कारण हो सकते हैं।
सांप का जहर हो जाता है पेट में न्यूट्रिलाइज्ड
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि तीसरे परिवार में मारे गए छह बच्चों के शरीर में किसी भी तरह के सांप के काटने के निशान नहीं थे। इससे साफ है कि उनके खाने या अन्य स्रोत से उनके पेट में कोई जहरीला पदार्थ पहुंचाया गया है। जब किसी को सांप काटता है तो उसका जहर दो तरह से मानव शरीर पर प्रभाव करता है। इसमें एक रक्त में मिलकर और दूसरा दिमाग के तंत्र को क्षतिग्रस्त कर देता है। इससे इंसान की मौत हो जाती है। अगर सांप का जगर खाने में मिला दिया हो तो वह पेट में जाकर प्राकृतिक एसिड में खुद ही न्यूट्रिलाइज्ड (खत्म) हो जाता है।
एफएसएल की रिपोर्ट करेगी खुलासा
बड्डाल मामले में हुई मौतों में मृतकों के विसरा की रिपोर्ट का जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी विभाग को इंतजार है। विभाग के टेक्निशियनों का कहना है कि डीआरडीओ ग्वालियर और दूसरी जगह सैंपल भेजे गए सेंपलों की रिपोर्ट आने के बाद ही खुलासा होगी कि मौतें कैसे हुई हैं। स्थानीय स्तर पर जितने भी सैंपल लिए गए और जांच की गई, उनमें वायरस या वैक्टीरिया की पुष्टि नहीं हुई है।