ग्रामीण विकास को लेकर जम्मू-कश्मीर के सबसे बड़े कार्यक्रम बैक टू विलेज के चौथे संस्करण में पांच दिन के भीतर 4500 अफसर गांव-गांव जाकर पांच हजार समस्याओं का निपटारा करेंगे। 35 विभागों का अमला 4483 पंचायतों में दो दिन और एक रात बिताकर 85 कल्याणकारी योजनाओं के तहत ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही समाधान सुनिश्चित करेगा।
नौकरशाही गांवों में पहुंचने से राहत पंचायत की राशि भी बढ़ाए सरकार
बैक टू विलेज कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर बदलाव का प्रभावी कदम करार देते हुए ऑल जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस ने पंचायतों की राशि बढ़ाने की मांग की है। कांफ्रेंस के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हीं के डेलीगेशन ने गृह मंत्री को सुझाव दिया था, जिससे यह कार्यक्रम शुरू हुआ। इससे नौकरशाही को जमीनी हालात का पता चल रहा है। यह सकारात्मक पहल है, लेकिन प्रति पंचायत 10 लाख रुपये निर्धारित राशि को बढ़ाकर कम से कम 25 लाख किया जाना चाहिए।
इसके अलावा कैपेक्स बजट में 22-23 लाख मिलते हैं, जिसे बढ़ाने का फैसला किया जाना चाहिए। अनिल शर्मा ने कहा - 14वें वित्त आयोग की 2019-20 की एक किस्त अभी तक नहीं मिली है। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग की पहली व दूसरी किस्त से भी प्रदेश महरूम है। केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद विशेष परिस्थितियों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर को 15वें वित्त आयोग की राशि दी जानी चाहिए।
जन अभियान में रूपरेखा तैयार कर ली गई है। सभी अधिकारी अपने संबंधित क्षेत्र में जाकर जनसुनवाई और चिह्नित कामों को अंजाम तक पहुंचाने की व्यवस्था करेंगे। एक साथ करीब साढ़े चार हजार पंचायतों में राजपत्रित अफसरों की मौजूदगी से जनता के मुद्दे सुलझाए जाएंगे। -रोहित कंसल, अध्यक्ष, बैक टू विलेज कार्यक्रम समिति