महिला हितों को लेकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले राजनीतिक दल चुनावों में महिलाओं के वोटों के लिए लोकलुभावन वादे तो करते हैं, लेकिन महिलाओं को उम्मीदवार बनाने के नाम पर पलटी मार जाते हैं।
घाटी के मौजूदा विधानसभा चुनावों में तो सभी राजनीतिक दलों ने महिलाओं को एक सिरे से ही बिसरा दिया है। बड़ी बात ये है कि घाटी में सबसे ज्यादा मतदान करने में महिलाएं ही आगे रहती हैं।
बावजूद इसके 87 सदस्यीय विधानसभा में राज्य के चारों प्रमुख दलों ने मात्र 12 महिलाओं को ही टिकट दिया है। इनमें से आधी महिलाएं भी केवल नेशनल कान्फ्रेंस के टिकट पर मैदान में उतरेंगी। बाकी किसी भी दल ने महिला उम्मीदवारों पर ज्यादा विश्वास नहीं जताया।
देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी भाजपा ने तो मात्र दो महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, दोनों ही दूसरी पार्टियों का दामन छोड़कर कुछ दिन पहले ही भाजपा में आई हैं।
सबसे हैरतजनक तो ये है कि राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल पीडीपी की अध्यक्षा खुद एक महिला हैं। लेकिन महिलाओं को टिकट के नाम पर उन्होंने भी हाथ खींच लिया और हजरतबल से मात्र एक महिला उम्मीदवार को टिकट दिया। हालांकि वो खुद चुनाव नहीं लड़ रही हैं। कांग्रेस ने जरूर तीन महिलाओं को टिकट दिया है लेकिन उनमें से भी कोई बड़ा नाम नहीं हैं।
चुनावों में मात्र तीन फीसदी हैं महिला उम्मीदवार
रियासत के वर्तमान सत्तारूढ़ दल नेशनल कान्फ्रेंस ने छह महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर जरूर दरियादिली दिखाई है। इनमें सबसे प्रमुख राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और हब्बाकदल से विधायक एंव एनसी प्रत्याशी शमीमा फिरदौस।
राजनीति में काफी जाना पहचाना नाम शमीमा फिरदौस लंबे से राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं, ऐसे में पार्टी ने दोबारा उन पर विश्वास जताया। इसके अलावा पार्टी ने और पांच महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है। जिनमें से एक हैं छंब से शक्ति बाला।
दूसरी ओर राज्य में जिस पार्टी से सबसे ज्यादा उम्मीदें लगाई जा रही हैं उसी भाजपा ने महिलाओं को सबसे ज्यादा नाउम्मीद किया है। भाजपा ने मात्र दो महिलाओं को टिकट दिया, दोनों ही पूर्व में दूसरे दलों में रह चुकी हैं।
सोनवार सीट से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने लड़ रही दरक्षण अंद्राबी पूर्व में नेशनल कान्फ्रेंस में रही हैं और वर्तमान में उन्हें वहां कड़ी टक्कर दे रही हैं। भाजपा से दूसरा नाम डा. हिना भट का। पेशे से डेंटिस्ट हिना भट के पिता रफीक भट भी पूर्व विधायक रहे हैं। बेलौस और बेलाग हिना भट हाल ही में 370 के मुद्दे पर विवादित बयान देकर चर्चा में आ गईं थी।
पीडीपीः अध्यक्ष महिला लेकिन टिकट दिया सिर्फ एक
इस मामले में भाजपा से आगे रहने वाली कांग्रेस ने जरूर तीन महिलाओं को टिकट दिया है लेकिन उनमें कोई बड़ा नाम नहीं है। पार्टी ने जांदीबल से शमीमा रैना और आरएसपुरा से सुमन भगत को टिकट दिया है। जबकि सोनवार में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने पार्टी ने खेमलता वकालू को टिकट थमाया है।
हालांकि तीनों महिला उम्मीदवार पार्टी की आकांक्षाओं को कितना पूरा करती हैं ये तो चुनावों के बाद ही पता चलेगा लेकिन कम महिलाओं की उपेक्षा करने पर जरूर पार्टी पर सवाल खड़ा हो गया है।
दूसरी ओर महिलाओं को सबसे ज्यादा निराशा हुई राज्य के मुख्य विपक्षी दल पीडीपी से। जिसकी मुखिया खुद एक महिला महबूबा मुफ्ती हैं। बावजूद उसके पार्टी ने पूरी तरह महिलाओं की अनदेखी की है। पार्टी की एक मात्र महिला प्रत्याशी हजरत बल से चुनाव लड़ रही आशिया नकास हैं।
जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर अनुराग गंगग्ल इस मुद्दे को अलग नजरिए से देखते हैं उनका कहना है कि राजनीति में महिलाएं खुद अपनी भूमिका को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। न ही उतने मुखर तरीके से खुद के लिए टिकट की मांग करती हैं।
उनके अनुसार जब तक महिलाएं खुद आगे आकर अपनी जिम्मेदारी नहीं मानेंगी तब तक उनकी स्थिति सुधरने वाली नहीं हैं। हालांकि इसके लिए वो पार्टियों को भी दोष देते हैं जो टिकट वितरण के समय महिलाओं पर भरोसा नहीं करतीं।