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कश्मीर में वाजपेयी के आगे फीका मोदी मैजिक?

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कश्मीर में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान शुरू होने में बस एक दिन शेष रह गया है। पहले चरण में कश्मीर और लद्दाख संभाग की 15 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए प्रचार का शोर भी थम गया है।
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अभी तक कश्मीर की सत्ता से दूर रही भाजपा भी मोदी लहर के बूते कश्मीर में पहली बार कमल खिलने का सपना देखने लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी का भी पिछले कुछ समय में कश्मीर से खास लगाव देखने को मिला है। दो दिन पहले वो किश्तवाड़ में रैली कर कश्मीरीयों का दिल जीतने का प्रयास भी कर चुके हैं।

बेशक आज देशभर में मोदी लहर और मोदी मैजिक का जादू चल रहा हो लेकिन हकीकत ये ही है कि कश्मीरियों के दिलों पर आज भी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राज करते हैं। वाजपेयी की नीतियों की आम कश्मीरी ही नहीं विरोधी दल भी तारीफ करते नहीं अघाते।
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आज भी लोग कश्मीर में शांति का श्रेय काफी हद तक पूर्व प्रधानमंत्री को ही देते हैं। यही कारण है कि कश्मीर में आते ही वाजपेयी के नाम के आगे मोदी मैजिक फीका पड़ता नजर आता है।

वाजपेयी की नीतियों को आज तक याद करते हैं कश्मीरी

कश्मीर में जब उग्रवाद चरम पर था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी उदारवादी नीतियों से न सिर्फ कश्मीरियों का दिल जीता ‌बल्कि आतंकवाद पर भी लगाम लगाई।

90 के दशक में आतंकवाद से सुलग रहे कश्मीर में एनडीए सरकार के दौरान ही आतंकवाद में कमी आनी शुरू हुई। 99 के कारगिल युद्ध के बाद मुंह की खाए पाकिस्तान और आतंकवादियों को धीरे धीरे यहां से अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ा।

आतंकवाद के जख्मों पर मरहम लगा तो आम कश्मीरी को वाजपेयी में एक उम्‍मीद की किरण दिखने लगी। वाजपेयी से उस दौर में जुड़ा रिश्ता कश्मीरियों के दिलों में आज भी जिंदा है।

कश्मीर में आज भी भाजपा के नाम पर नाक भौं सिकोड़ने वाले लोग वाजपेयी का जिक्र बड़े खुश होकर करते हैं। हालिया चुनावों में भी बेशक हर तरफ मोदी लहर का असर दिख रहा हो लेकिन कश्मीर में वाजपेयी के नाम के आगे आज भी वह फीका है।

विरोधी भी करते हैं वाजपेयी की नीति की तारीफ

कश्मीर में वाजपेयी की स्वीकार्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ‌आम कश्मीरी के साथ-साथ विरोधी नेता भी वाजपेयी की तारीफ करते नहीं थकते।

आमतौर पर राजनीति में विरोधी नेताओं की तारीफ करने से परहेज ही रखा जाता है लेकिन वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं है। विरोधी दल आज भी उनकी तारीफ करते हैं। चाहे वो पीडीपी नेता हों या सत्तारुढ नेशनल कान्फ्रेंस के।

पीडीपी अध्यक्षा महबू‌बा मुफ्ती और पार्टी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद खुलकर तो वाजपेयी के बहाने भाजपा नेताओं को जब तब निशाना बनाते हैं। सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और फारुख अब्दुल्ला आज भी वाजपेयी से अपने मधुर संबंधों का हवाला देते हैं।
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बोले मोदी-यहां वाजपेयी की नीतियों को बढ़ाने आया हूं

कश्मीर में वाजपेयी के नाम का महत्व भाजपाई भी भली-भांति समझते हैं। यही कारण है कि प्रचार के दौरान मोदी के नाम के साथ-साथ वाजपेयी का भी उतना ही जिक्र किया जाता है।

दो दिन पहले किश्तवाड़ में चुनावी रैली को संबोधित करने आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अपने भाष्‍ाण के दौरान वाजपेयी का नाम लेना नहीं भूले। उन्होंने तो यहां तक कहा कि वो वाजपेयी की नीतियों को ही आगे बढ़ाने आए हैं।

इससे पूर्व आए पार्टी अध्यक्ष्‍ा अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी वाजपेयी के नाम का सहारा लेकर कश्मीरियों पर डोरे डाल चुके हैं। हाल में हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में बेशक पोस्टर बैनरों से वाजपेयी का चेहरा गायब हो चुका हो लेकिन कश्मीर में तस्वीर दूसरी है।

यहां हर बैनर पर एक तरफ मोदी का फोटो दिख जाए तो दूसरी ओर मुस्कराते अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर उनकी अहमियत खुद ब खुद बयां कर देती है।
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