न्यायाधीश संजय धर ने सुनवाई करते हुए कहा था कि इस केस में चार्जशीट पेश हो चुकी है और कानून के तहत अब चार्जशीट की सुनवाई जम्मू से श्रीनगर ट्रांसफर नहीं की जा सकती। न्यायालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में जम्मू के अलावा कोई अन्य विशेष न्यायालय नहीं आता है और अगर यह मान भी लिया जाए कि याचिका में कोई तर्क है तो कानून के तहत याची को राहत प्रदान नहीं की जा सकती।
याची दविंदर सिंह ने तर्क दिया था कि मामले की सुनवाई के लिए अधिकतर गवाह श्रीनगर से हैं। वह श्रीनगर के इंदिरा नगर का निवासी है और परिवार भी वहां रहता है। जम्मू में उसका कोई नहीं होने से केस सुनवाई में परेशानी हो रही है। ऐसे में वह कश्मीर में अपना वकील करके उसे बार-बार जम्मू नहीं ला सकता है।
एनआईए की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि याची की मांग में कोई आधार नहीं है। अगर जम्मू के वकील उसका केस लड़ने को तैयार नहीं तो याची निशुल्क कानूनी मदद का हकदार है।
जम्मू कश्मीर में केवल तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायालय जम्मू को ही एनआईए कोर्ट का दर्जा मिला है और इसी विशेष अदालत में एनआईए मामलों पर सुनवाई का अधिकार है। लिहाजा ऐसे मामले को श्रीनगर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।