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जैश के नारको टेरेरिज्म मॉड्यूल का पर्दाफाश, छह मददगार गिरफ्तार

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श्रीनगर। घाटी में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नारको टेरेरिज्म मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों के छह मददगारों (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है। इनसे हथियार और गोलाबारूद के अलावा एक किलो हेरोइन तथा 1.55 लाख रुपये नकदी बरामद की गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के चाडूरा इलाके में एक सूचना के आधार पर सेना की 50 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), 29वीं बटालियन सीआरपीएफ और बडगाम पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया और आतंकियों के 6 मददगार गिरफ्तार किए हैं। इनके पास से 1 चीनी पिस्टल, एक मैग्जीन, 4 कारतूस, 1 हैंड ग्रेनेड, 1 किलो हेरोइन और 1 लाख 55 हजार की नकदी बरामद हुई है।
एसएसपी बडगाम आमोद नागपुरी ने बताया कि यह ग्रुप पाकिस्तान में बैठे आकाओं के साथ सीधा संपर्क में था और वह ड्रग ट्रेड के साथ-साथ सक्रिय आतंकियों को हथियारों की सप्लाई और पैसा मुहैया करवाते थे। इनकी गिरफ्तारी के साथ आतंकियों और ड्रग डीलरों के बीच के कनेक्शन का पता लगा है। गिरफ्तार ओजीडब्ल्यू की शिनाख्त त्रालपोरा के मुद्दसिर फय्याज, वाथोरा के शबीर गनई, कुपवाड़ा के सगीर अहमद पोसवाल, शोपियां के इशहाक भट और अरशिद ठोकर के तौर पर हुई है।
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-कुपवाड़ा से सीमापार से मिली कंसाइनमेंट के साथ ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में भी सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान एक ओजीडब्ल्यू को पकड़ा है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सूचना मिली थी कि करनाह के रहने वाले मोहम्मद हफीज रैना को एलओसी के पार से एक कंसाइनमेंट भेजी गई है जिसे उसेे आतंकियों को सौंपना है। इसके बाद हरकत में आई टीम ने उसे धर दबोचा। उसके पास से 10 ग्रेनेड, 4 वायरलेस सेट, एके 47 के 200 कारतूस के अलावा अन्य सामग्री बरामद हुई है। इसके पास से कुछ नशीले पदार्थ भी बरामद हुए, जिसकी जांच की जा रही है।
-युवाओं को आतंक के रास्ते पर लाने के लिए नशा आसान जरिया
कश्मीर घाटी में पिछले करीब 3 दशकों से अधिक समय से सक्रिय आतंकियों के मददगार (ओजीडब्ल्यू) अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव ला रहे हैं। घाटी के युवाओं को आतंक के रास्ते पर लाने के लिए अब नशे की ओर धकेल रहे हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी संगठनों और उनके मददगार ओजीडब्ल्यू अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव रहे हैं। इन्होंने नशे को भी अपना हथियार बना लिया है। घाटी के युवाओं को आतंक के रास्ते पर लाने के लिए ये सबसे आसान जरिया है। पहले ये लोग युवाओं को नशे की लत लगाते हैं। एक बार लत लग गई तो नशे की पूर्ति के लिए युवा किसी भी घटना को अंजाम देने के लिए तैयार हो जाएंगे। इससे आतंकी संगठनों को नई भर्ती में भी आसानी होगी क्योंकि एक बार जो युवक आतंक के रास्ते पर निकल गया, उसकी वापसी मुश्किल है। पुलिस आतंकियों के हर नापाक मंसूबे के खिलाफ कमर कसे हुए हैं।
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