सेना की इंजीनियरिंग विंग ने कोटरंका दरिया पर 180 फीट लंबे अस्थायी पुल का निर्माण करके राजोरी-बुद्धल राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया है। इससे दूरवर्ती बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी।
इस पुल से राजोरी और रियासी जिले के बीच संपर्क कायम हो जाने से करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को राहत मिली है। सेना के सैकड़ों जवानों ने दिन-रात काम कर डबल स्टोरी पुल का निर्माण किया है।
दस इंजीनियर रेजीमेंट के जवानों की कड़ी मेहनत से दो जिलों का आपस में संपर्क बहाल हो सका है। पिछले कुछ दिनों में सेना और बार्डर रोड आर्गनाइजेशन के करीब दस हजार जवानों और इंजीनियरों ने करीब एक हजार स्थानों पर संपर्क मार्गों को बहाल करने का काम किया है।
51 गांवों के लाखों लोगों को मिलेगी राहत
भूस्खलन और बाढ़ के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में संपर्क मार्गों को सबसे ज्यादा क्षति पहुंची थी। इसमें कोटरंका दरिया पर विशाल पुल का निर्माण बड़ी चुनौती थी। इस क्षेत्र में 51 गांवों के हजारों लोगों को देश के अन्य हिस्सों से संपर्क कट गया था।
इस पुल के निर्माण में कई जवानों को गंभीर चोटें भी आईं, लेकिन उन्होंने अभूतपूर्व साहस का परिचय देते हुए विशाल अस्थाई पुल का निर्माण किया है। आपरेशन मेघ राहत के तहत चलाए गए इस अभियान में तकनीक के साथ मानव शक्ति का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी सेना ने दिन रात काम करके कई अस्थायी पुलों का निर्माण किया है, जिससे हजारों लोगों को आवाजाही में राहत मिली है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत सामग्री पहुंचाने में तेजी आई है।
तीन राजमार्गों से घाटी में यातायात बहाल
बाढ़ से प्रभावित कश्मीर घाटी में तीन राजमार्गों मुगल रोड, श्रीनगर-जम्मू और किश्तवाड़-सिंथन लिंक से यातायात बहाल कर दिया गया है। यातायात बहाल होने से कश्मीर घाटी में जरूरी सामान को पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जो कि रोजाना वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं, ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावितों इलाकों में राशन, स्वच्छ पेयजल, कंबल, टेंट, दवाइयां आदि पहुंचाए जाने पर जोर दिया है। इसके अलावा श्रीनगर शहर में साफ-सफाई को तेजी से करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री का कहना है कि श्रीनगर शहर कई कालोनियों से पानी की निकासी पंपों के माध्यम से प्राकृतिक जल स्रोतों में की जा रही है। उनका कहना है कि बिजली और पेयजल आपूर्ति को दक्षिण कश्मीर में भी बहाल कर दिया गया है। बहरहाल पांपोर में अभी आंशिक रूप से ही बिजली की आपूर्ति बहाल हो पाई है।