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कश्मीर में सेना, सीआरपीएफ, वायुसेना ने संभाला मोर्चा

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वादी में अवाम की सहायता के लिए सेना के 50 कालम तैनात किए गए हैं। वह वोटों की सहायता से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रही है। सेना अपने इस मिशन के तहत अब तक 400 लोगों को सुरक्षित बचा चुकी है। उन्होंने इनको बेमिना, पांदरेठन तथा लासजन से सुरक्षित बाहर निकाला।
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इसके अलावा 300 लोगों को सोपोर तथा पट्टन से सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। इसके अलावा दक्षिण कश्मीर के पंपोर, काकपोरा, खन्नाबल, अनंतनाग तथा कुलगाम जिलों में बाढ़ प्रभावित इलाकों से फंसे 800 लोगों को निकाल कर सेना द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वायु सेना भी प्रशासन के सहयोग के लिए तैयार है। उसने आज के बचाव कार्यों में भाग लिया और अगर मौसम में सुधार होता है तो वह बड़े पैमान में इसमें जुट जाएगी।

श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात ठप

कश्मीर संभाग के सभी दस जिलों में बाढ़ का प्रकोप जारी है। लगातार चौथे दिन शुक्रवार को भी बारिश का कहर बरपा। कुलगाम और कुपवाड़ा जिलों में पांच लोग बाढ़ में बह गए। इससे अब तक कुल नौ लोग कश्मीर में बाढ़ से लापता है।

बाढ़ का सीधा असर संभाग के दो सौ गांवों के अलावा प्रमुख कसबों के अलावा श्रीनगर शहर पर भी पड़ा है। दो दर्जन से अधिक कच्चे मकान भी गिर गए हैं। श्रीनगर शहर की कई प्रमुख सड़कें नालों में तबदील हो गई हैं।

झेलम और सिंध नदियों के अलावा अन्य छोटे-बड़े नालों में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। जलभराव वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की मदद से अतिरिक्त किश्तियां भेज कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

झेलम, सिंध में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

बाढ़ के कारण अधिकतर इलाकों में बिजली और जलापूर्ति ठप है। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर यातायात तीसरे दिन भी बंद रहा। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, वायु सेना और रेडक्रास बडे पैमाने पर अवाम राहत और बचाव कार्यों में जुट गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की हिदायत पर राष्ट्रीय आपाद राहत फोर्स के तीन सौ जवानों ने कश्मीर में पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है। एनडीआरएफ के चार दल नई दिल्ली और दो दल भठिंडा से सुबह पहुंच गए हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ दोपहर में गुपकार रोड स्थित अपने निवास पर बैठक कर राज्य में बाढ़ पर पैदा हुई स्थिति पर चर्चा की। बैठक में उन्होंने मंत्रियों को प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों का दौरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने लिया हालातों का जायजा

इसके बाद सभी मंत्री विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रवाना हो गए। मुख्यमंत्री ने दिनभर बडगाम, पुलवामा, बारामुला और श्रीनगर जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर खुद राहत कार्यों का जायजा लेकर जिला प्रशासन के साथ बैठकें भी कीं। मुख्यमंत्री उमर ने खुद बीती रात को श्रीनगर शहर के कई इलाकों में राहत और बचाव कार्यों का मुआयना किया था। मुख्यमंत्री वीडियो कांफ्रेंस के जरिये भी जम्मू और कश्मीर संभागों में बाढ़ से पैदा हालात और राहत कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।

उत्तरी कश्मीर के बोनियार इलाके में सेना की 34 आरआर और बीएसएफ की 18वीं बटालियन के 12 शेल्टर शेड और कुछ वाहन भी बाढ़ में बह गए। हालांकि वाहनों पर सवार जवान बाल-बाल बच गए। पीएचई, बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई विभाग के आयुक्त सचिव डा. पवन कोतवाल का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी की निकासी के लिए वाटर पंपों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सिर्फ श्रीनगर शहर में ही पचास वाटर पंप लगाए गए हैं। कई इलाकों में बाढ़ के पानी का बहाव मोड़ने के लिए जेसीबी और क्रेनों की भी मदद ली जा रही है। हर जिले में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
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सेना का बचाव कार्य जारी

बाढ़ के कारण पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए कश्मीर प्रशासन के सहयोग में सेना जुट गई है। उसने बचाव कार्य को मिशन सहायता का नाम दिया है। प्रशासन के साथ मिलकर वह कई जानों को बचा चुकी है और बड़ी संख्या में लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों में भेजने में सफल रही है। वायु सेना ने भी शुक्रवार को कुछ जगहों पर बचाव कार्यों में भाग लिया।

सेना के एक प्रवक्ता के अनुसार, बाढ़ में फंसे लोगों के लिए शुरू किए गए बचाव कार्य को उसने मिशन सहायता का नाम दिया है। उन्होंने बताया कि कई दिनों की बारिश के कारण कश्मीर के अधिकतर इलाकों में जो स्थिति पैदा हुई है उससे निपटने तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए उसके कई जवान तथा अधिकारी काम में जुटे हुए हैं।
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