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'प्रशासन चुप था, हम भी शांत थे': जम्मू में प्लॉट मालिकों ने दो से 3 हजार में राष्ट्रीय सुरक्षा से किया समझौता

Thu, 17 Sep 2026 03:00 PM IST
Sharukh Khan अरुण कुमार, अमर उजाला, जम्मू

सार

जम्मू रोहिंग्या बस्ती: जम्मू में प्लॉट मालिकों ने बस दो से तीन हजार में राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर दिया। 40 कनाल जमीन में 300 झुग्गियों को तैयार कर सात हजार रोहिंग्याओं को शरण दे दी। नावलेकर समिति की रिपोर्ट के बाद दो सितंबर को नोटिस जारी कर प्रशासन ने कार्रवाई का दबाव बढ़ाया है। प्लॉट मालिकों ने सभी से जगह खाली करा ली हैं। 
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झुग्गियां खाली करते रोहिंग्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नरवाल में 40 कनाल जमीन पर अवैध रूप से बसाई गई रोहिंग्या बस्ती की सभी 300 झुग्गियों को बुधवार को हटा दिया गया। इस बीच सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया कि प्लॉट मालिकों ने इन घुसपैठियों से दो से तीन हजार रुपये लेकर रहने की जगह मुहैया कराई। 
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बिजली और पानी के कनेक्शन भी दिलाए। जम्मू-कश्मीर का निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड बनवाने में मदद की। स्थानीय लोगों से रिश्ते कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता भी कर लिया।

अगस्त में जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच के लिए पहुंची नावलेकर समिति की रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक स्तर पर सख्ती शुरू हुई। प्रशासन ने दो सितंबर को संबंधित प्लॉट मालिकों को निशाने पर लिया। उन्हें नोटिस देकर घुसपैठियों को शरण देने और फर्जी दस्तावेज बनवाने के साथ देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में कार्रवाई की चेतावनी दी।
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इसका सीधा असर हुआ। मंगलवार को रोहिंग्या झुग्गियों को खाली करने लग गए, जो बचे थे उन्होंने बुधवार को जगह खाली कर दी। इस बीच नरवाल बस्ती में दिनभर अफरा-तफरी रही। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर बनी रहीं और बस्ती से जाने वाले रोहिंग्या परिवारों पर नजर बनाए रखीं। प्रशासनिक सूत्रोें के अनुसार यहां के बाद किरयानी तालाब, मलिक मार्केट, सुंजवां, बठिंडी, बाहु फोर्ट क्षेत्र में रहने वाले रोहिंग्याओं पर कार्रवाई हो सकती है।
 

चुनौती
पुलिस के साथ सुरक्षा एजेंसियों को अब यह चिंता है कि नरवाल से हटाए गए रोहिंग्या कहां और किस ओर रुख करेंगे। उनका अगला ठिकाना क्या होगा। इस दौरान झुग्गी छोड़ रहे सद्दाम ने बताया कि हमारी पहली कोशिश जम्मू के दूसरे हिस्सों में रहने वाले रिश्तेदारों के पास शरण लेने की है। अगर वहां भी नहीं रहने दिया गया, तो पंजाब, हरियाणा के नूह या फिर हैदराबाद व बेंगलुरु चले जाएंगे, जहां म्यांमार से आने के बाद रुके थे। कुछ साथी नेपाल के काठमांडू में हैं। उनसे भी मदद ले सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष अब इनकी ट्रैवल हिस्ट्री को ट्रेस करने की चुनौती है।

चिंता 
नरवाल में एक ही जगह करीब सात हजार रोहिंग्या रहते थे। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस इनकी आसानी से निगरानी कर लेती थी। अब इनका नरवाल से निकलकर शहर के दूसरे हिस्सों में जाना, सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती होगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार रोहिंग्या यहां करीब 2008 से रह रहे हैं। इन करीब 18 वर्षों में वे स्थानीय बोली, पहनावे और रहन-सहन में पूरी तरह ढल गए हैं। यहां उनके रिश्ते भी हो गए हैं। ऐसे में अब इन रोहिंग्या की निगरानी आसान नहीं होगी।
 

चौकसी
जम्मू में रोहिंग्याओं पर कार्रवाई के साथ ही उधमपुर, कठुआ, रियासी, पुंछ, रजौरी को भी अलर्ट किया गया है। आशंका जताई गई है कि जम्मू में कार्रवाई के बाद वे संबंधित जिलों में जा सकते हैं। ऐसे में स्थानीय पुलिस व प्रशासन को तैयार रहने के लिए कहा गया है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों ने हरियाणा, पंजाब व दिल्ली को भी इनके प्रति अलर्ट किया है।

चालबाजी
नरवाल से हटाने के दौरान रोहिंग्याओं ने दूसरे दिन संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के बैनर व पोस्टर लेकर सहानुभूति जुटाने का भी प्रयास किया। बच्चों को आगे करके शिक्षा, सुरक्षा और परिवारों की मदद की मांग उठाई। कुछ पोस्टरों में डिटेंशन सेंटर में बंद लोगों की रिहाई और निर्वासन से बचाने की अपील की गई। सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई के बीच अचानक इस तरह पोस्टर लेकर सामने आने को सुनियोजित तैयारी का हिस्सा मान रही हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर इस प्रयास का रोहिंग्याओं को कोई समर्थन नहीं मिला।

प्रशासन चुप था, हम भी शांत थे
नरवाल स्थित प्लॉट मालिक सद्दाम ने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें दो सितंबर को नोटिस दिया गया था, जिसमें जमीन खाली कराने के निर्देश थे। ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। सद्दाम के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद रोहिंग्याओं से जगह खाली करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि हम स्थानीय हैं। प्रशासन के निर्देशों को अनदेखा नहीं कर सकते। हमें यहीं रहना है। प्रशासन ने जब तक सख्ती नहीं दिखाई तो हम भी शांत थे। हमें पैसे मिल रहे थे। अब जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई है, तो हमने भी अपनी जमीन खाली करा ली है।
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कार्रवाई की असल तस्वीर
7000 : रोहिंग्या हटाए गए
40 : कनाल में आबाद बस्ती खाली

खास-खास
-कार्रवाई में पुलिस सीधे नहीं हुई शामिल।
-नहीं किया गया बल प्रयोग।
-प्रशासन की ओर से नोटिस का दबाव आया काम।
 
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