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पूरी सेना मिलकर भी आतंकियों से नहीं बचा सकती: फारूक अब्दुल्ला

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने पीओके संबंधी अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर मसले का सैन्य नहीं सियासी हल ही रास्ता है।
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बातचीत के जरिये ही इस मसले को हल किया जा सकता है। कब तक सेना हमारा बचाव करती रहेगी। पाकिस्तान अगर न चाहे तो भी हमारी पूरी सेना आतंकवादियों को यहां आने से नहीं रोक सकती।

वे दक्षिण एशिया में शांति के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों पर जेएंडके फोरम फार पीस एंड रिकंसिलिएशन की ओर से आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि परमाणु संपन्न दोनों राष्ट्रों में न तो जंग से मसला हल हो सकता है और न ही 1947 का जम्मू कश्मीर अब कभी एक हो सकता है। उन्होंने कहा कि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा रहे और जम्मू कश्मीर भारत का वह अपने इस बयान पर कायम हैं।
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अमेरिका किसी को मित्र नहीं मानता

हालांकि उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस ने यह कभी नहीं कहा कि यह एकमात्र हल है। अगर इससे बेहतर कोई हल हो सकता है तो उस पर बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद के 1994 के प्रस्ताव के बाद भी कुछ नहीं किया गया। सीमा पर गोलियां चलती हैं।

इधर भी लोग मरते हैं और उधर भी। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर का जो हिस्सा चीन को दिया है उस पर बात नहीं होती। न हममें इतना दम है कि पाक अधिकृत कश्मीर को ले लें।

न उनमें दम है कि वह जम्मू कश्मीर को भारत से ले लें। ऐसे में बातचीत होनी चाहिए। अमेरिका किसी को मित्र नहीं मानता। वह केवल हथियार बेचता है और अपने राष्ट्र के हितों को ही प्राथमिकता देता है।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जम्मू कश्मीर मसले के हल के लिए पाकिस्तान जाकर ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। अगर वाजपेयी की सरकार देश में बनी रहती तो जम्मू कश्मीर मसले का हल निकल सकता था।
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