पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला ने पीओके संबंधी अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा है कि जम्मू कश्मीर मसले का सैन्य नहीं सियासी हल ही रास्ता है।
बातचीत के जरिये ही इस मसले को हल किया जा सकता है। कब तक सेना हमारा बचाव करती रहेगी। पाकिस्तान अगर न चाहे तो भी हमारी पूरी सेना आतंकवादियों को यहां आने से नहीं रोक सकती।
वे दक्षिण एशिया में शांति के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों पर जेएंडके फोरम फार पीस एंड रिकंसिलिएशन की ओर से आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि परमाणु संपन्न दोनों राष्ट्रों में न तो जंग से मसला हल हो सकता है और न ही 1947 का जम्मू कश्मीर अब कभी एक हो सकता है। उन्होंने कहा कि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा रहे और जम्मू कश्मीर भारत का वह अपने इस बयान पर कायम हैं।