वह अपने मृतक पिता का मुंह तक नहीं देख सका है। सतीश के अंतिम संस्कार में गांव के सभी लोग मौजूद थे, सिवाय नितिन के। सतीश ने पहले भी अपने खेतों में दो मकान बनाए थे, जिनमें अक्सर दरारें पड़ जाती थीं। किसी श्राप के खौप से सतीश ने अपनी जमीन छोड़ किसी से 25 हजार रुपये में जमीन खरीदी और उस पर मकान बनवाया।
हादसे के कुछ ही देर पहले इस घर से निकली एक लड़की ने बताया कि, दोपहर करीब ग्यारह बजे का समय था, जिस समय ये हादसा हुआ। उसने बताया कि सतीश एक दिन पहले शाम को अपने साले के साथ ससुराल से लौटा था। 'मैं सुषमा से मिलने गई थीं। उसने बताया कि परिवार के सदस्य सो रहे थे और सुषमा चरखा कात रही थी।
कुछ देर बाद बात करने के बाद मैं लौट आई।' 'घर के पीछे चीड़ के पेड़ को खिसकते देखा तो इसकी खबर अपने पिता को दी। जब तक पिता सचेत होते कि पहाड़ी घर के ऊपर आ गिरी।'
मलबे में दबे सभी सात शवों को निकाले
डोडा
के देसा क्षेत्र के दवाल कुंड गांव में शुक्रवार की सुबह एक मकान पर
पहाड़ी खिसकने से दबे तीन और शवों को रविवार को खोज लिया गया। मलबे में दबे
सभी सात शवों को निकाल लिया गया है। मृतकों में चार बच्चे भी शामिल हैं।
जानकारी
के अनुसार जिस समय हादसा हुआ, उस समय घर में सतीश कुमार (36), उसकी पत्नी
सुषमा देवी, उसकी बेटियां अंजना (8), बिंदू (3), बेटे केवल (5), रेवन (1)
और सतीश का साला सुरेश कुमार (16) थे। सभी को घर से भागने का मौका तक नहीं
मिला।
पहले दिन दो ही शवों को निकाला जा सका था। इसके दूसरे दिन
सुषमा और अंजना के शव को खोज लिया गया। रविवार को सेना की 10आरआर बटालियन
के जवानों, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सतीष, केवल और रेवन के शव को
निकाल लिया गया।
सभी शव मलबे में गहराई में दबे थे। जिन्हें निकालने
में खासी मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर बारह बजे तक सभी शवों को खोज लिया गया।
सुषमा और सतीश का अंतिम संस्कार दवाल कुंड गांव में कर दिया गया, जबकि
सुरेश का शव उसके पैतृक गांव ग्रामड़ी भेज दिया गया।
उसका अंतिम संस्कार वहीं किया जाएगा। घटना के बाद आसपास क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को हर वक्त हादसे की आशंका सता रही है।
पूरे परिवार के पीछे पड़ी रही 'अकाल मौत'
देसा के दवाल कुंड गांव में भूस्खलन में दफन हुए सतीश कुमार के परिवार ने दुख और दर्द के सिवा कुछ नहीं देखा। अकाल मौत इस परिवार के पीछे हाथ धोकर पड़ी रही। परिवार के 18 सदस्यों की किसी ने किसी कारण अकाल मौत हुई है। गांव के लोग इसे श्राप की तरह मान रहे हैं।
गांव के लोगों ने बताया कि सतीश के बड़े भाई त्रिलोक और उनकी पत्नी की मौत दस साल पहले पहाड़ी से गिरकर हो चुकी है। सतीश की पहली पत्नी बिंद्रा देवी की मौत आठ साल पहले बिजली गिरने से हो गई थी। पिता जोधराम की भी अचानक मौत हुई थी जब वह अपनी बेटी से मिलने जा रहे थे।
इस परिवार को दुखों की कोई सीमा नहीं थी। अब शुक्रवार को कुदरत के कहर ने परिवार के सात सदस्यों को लील लिया। सतीश की पत्नी सुषमा गर्भवती थी। इस परिवार में सतीश की पहली पत्नी का एक बेटा नितिन (13 वर्ष) ही बचा है। सतीश मजदूरी करता था।
गरीबी की मार की वजह से उसने नितिन को जम्मू में किसी डीएसपी के घर पर काम पर रखा, जहां वह पढ़ाई भी कर रहा है। नितिन के सिर पर अब दुखों का पहाड़ है। डोडा-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के चलते नितिन अभी जम्मू में ही फंसा है।