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यहां क्लिक कर पढ़ें, फिदायीन हमले का पूरा ब्योरा

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नेशनल हाईवे एक बार फिर अल-सुबह गोलियों की गूंज से दहल उठा। जम्मू-नयी दिल्ली नेशनल हाईवे पर सरहद से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित कठुआ जिले के राजबाग थाने पर हुए फिदायीन हमले में एक पुलिस कर्मी और सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हो गए। आतंकियों ने दो नागरिकों की भी बेरहमी से हत्या कर दी।
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सुरक्षा बलों ने पांच घंटे चली मुठभेड़ के बाद दोनों आतंकियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ में एसडीपीओ समेत सुरक्षा बलों के एक दर्जन जवान जख्मी हुए हैं।

आतंकियों के कब्जे से दो एके47 राइफल, 21 मैगजीन, 356 जिंदा कारतूस, दो पिस्टल, दो पिस्टल मैगजीन, 31 जिंदा पिस्टल कारतूस, दो कटर, चार बैटरी सेल, एक चाकू, एक जीपीएस, ग्यारह ग्रेनेड, दो कोल्ड ड्रिंक की बोतल, नौ मीठी कैंडी बरामद की गई है।हमले का तरीका पिछले कई हमलों की तरह ही था।

माना जा रहा है कि दोनों आतंकी रात को सरहद पार कर नेशनल हाईवे पर आए। प्रारंभिक जांच के अनुसार आतंकियों ने सीमावर्ती इलाके से हाईवे और थाने तक पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया। फिदायीन हमले की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया।
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जवानों के सामने थी सबसे बड़ी चुनौती

मुश्किल यह थी कि कई जवान थाने के भीतर फंसे थे। सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित निकालने की थी। थाने की भीतरी हलचल पर नजर रखने के लिए हेलीकाप्टर का सहारा लिया गया। साढ़े दस बजे जब यह सुनिश्चित हो गया कि अब कोई भी जवान अंदर नहीं है तो दो मोबाइल बंकर भीतर भेजे गए।

वे मामूली धमाके कर वापस लौट आए। इसके बाद आपरेशन फिनिश करने के लिए जबरदस्त गोलाबारी की गई। करीब 12 बजे आपरेशन मुकम्मल होने का ऐलान किया गया। इस बीच हाईवे पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया था। सर्च आपरेशन अभी भी जारी है।

राजबाग पुलिस थाने के नजदीक दोनों आतंकियों ने जम्मू से हिमाचल जा रहे तीन फल विक्रेताओं को बंधक बनाया और उन्हें ढाल बनाकर थाने में घुस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार थाने में सबसे पहले आतंकियों ने गेट पर तैनात संतरी को गोली मारी। इसके बाद बंधकों पर गोलियां बरसाकर सीधे पुलिस थाने के रोजनामचा कक्ष में घुस गए।

देखते ही देखते थाना परिसर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। दो मंजिला थाना इमारत की दूसरी मंजिल में सीआरपीएफ के जवान ठहरे थे, जबकि निचली मंजिल में पुलिस कर्मी।

पांच घंटों तक चली मुठभेड़

ज्यादातर नफरी पुलिस थाने की आवासीय इमारत में मौजूद थी। बेहद फुर्ती दिखाते हुए पुलिस, सीआरपीएफ और सेना ने संयुक्त अभियान शुरू कर दिया। सुबह करीब 6.20 बजे शुरू हुई मुठभेड़ को दोपहर 11 बजे दोनों आतंकियों को ढेर करने के साथ खत्म कर दी गई।

आईजीपी जम्मू जोन दानिश राणा ने कहा कि आतंकी सीमावर्ती इलाके से हाईवे तक आए थे, जिसके बाद पुलिस थाने पर हमला कर दिया गया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों को शुरुआती कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ने दिया गया और पांच घंटों में दोनों को ढेर कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ हुई है या नहीं, यह जांच का विषय है।

हमले में जेकेपी कांस्टेबल पुरुषोत्तम लाल निवासी बंदोर, सीआरपीएफ 121 बटालियन के कांस्टेबल मोहित सूरज, कांस्टेबल सतीश कुमार, हिमाचल निवासी रंधीरा और जोगिंदर सिंह की मौत हो गई।

जैनपुर नरोट जैमल सिंह पंजाब निवासी जोगिंदर का शव अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे हरियाचक इलाके में स्थित वन विभाग की नर्सरी से बाइक सवार युवक का शव बरामद हो गया। उसकी हत्या गला रेतकर की गई थी।

ऐसे पहुंचे थाने तक

भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से आतंकियों ने बाइक पीबी35वी-1976 पर जा रहे जोगिंदर का गला रेत दिया। छपाकियां पहुंचकर उन्होंने एक टिप्पर जेके02एपी-5634 को रोकने का प्रयास किया जिसमें वह सफल नहीं हुए। फिर पैसेंजर ऑटो जेके08ए-5795 कब्जे में लिया।

ऑटो चालक को उन्होंने सांबा तक ले जाने को कहा लेकिन उसने तेल नहीं होने की कहकर जाने से मना कर दिया। ऑटो के माध्यम से वह हाईवे तक पहुंचे। दियालाचक पहुंचकर आतंकियों ने जम्मू से हिमाचल जा रही महिंद्रा पिकअप लोड कैरियर एचपी38सी-8366 को रोका और उसमें चढ़कर राजबाग पुलिस थाने के पास पहुंच गए।

आतंकियों ने इस वाहन को थाने के गेट से करीब दो सौ फुट पहले ही रोक दिया। इसी दौरान एक अन्य महिंद्रा पिकअप लोड कैरियर एचपी38सी-0538 को आतंकियों ने रोका और दोनों वाहनों में सवार तीनों लोगों को साथ लेकर वह थाने के मुख्य गेट तक पहुंच गए।

एक वाहन चालक रोहित कुमार और उसके अन्य साथी लखवीर ने बताया कि आतंकियों ने उन्हें मुलजिम बनाकर थाने के गेट के आगे किया। गेट संतरी ने जब सवाल किए तो आतंकियों ने कहा कि ये लोग दो नंबर का धंधा करते हैं जिन्हें हम पकड़ कर थाने लाए हैं। गेट खुलते ही आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

अपने ही जवानों की गलती से चली गोलियां

राजबाग पुलिस थाने के भीतर छिपे फिदायीन आतंकियों के साथ चल रही मुठभेड़ के दौरान बाहर हाईवे पर दो बार अफरातफरी मच गई। छावनी में तब्दील हो चुके हाईवे पर सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अफसरों और जवानों की मौजूदगी में दो बार सुरक्षाकर्मियों से खुद से ही गोली चल गई। मौके पर बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद थे।

पहली घटना सुबह 9:20 बजे हुई। एक सुरक्षा कर्मी की राइफल से तीन फायर हो गए। भीड़ के बीच हुई इस फायरिंग ने हड़कंप मचा दिया। सुरक्षा कर्मी की राइफल से निकली गोलियां सड़क पर जा लगीं। उस समय आईजीपी जम्मू जोन दानेश राणा और डीआईजी जम्मू कठुआ रेंज शकील अहमद बेग पास ही खड़े थे।

इसके बाद लोगों को मौके से तितर-बितर कर दिया गया। मुठभेड़ जारी ही थी कि हाईवे पर 10:56 बजे एक बार फिर से एक अन्य सुरक्षा कर्मी की राइफल से गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज ने सनसनी मचा दी। गनीमत रही कि इस बार भी सभी गोलियां सड़क पर लगीं। बहरहाल, कुछ देर के लिए भगदड़ का माहौल जरूर बन गया।

उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पूर्व जंगलोट सैन्य शिविर के पास चल रही मुठभेड़ के दौरान भी एक वरिष्ठ अफसर के पीएसओ की राइफल से भूलवश गोलियां चल गई थीं।
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सीमा पार से आए आतंकी: उमर

राजबाग थाने पर हमला करने वाले आतंकियों ने वीरवार रात को ही सीमा लांघी थी। इसके चलते ही सुबह ही उन्होंने हमला कर दिया। रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा कि मेरे कार्यकाल के दौरान भी ऐसे ही हमले हुए थे।

शुक्रवार को भी आतंकियों ने हमले का वही पुराना तरीका अपनाया है। जिस समय राजबाग में आतंकियों के साथ सुरक्षा बल लोहा ले रहे थे उमर ने ट्विटर पर लिखा कि मैं मानसिक तौर पर उन्हीं बहादुर जवानों के साथ हूं जो आतंकियों का डट कर मुकाबला कर रहे हैं।
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