रामगढ़। सीमावर्ती क्षेत्र में बारिश का पानी खेतों में जमा होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है। गेहूं की फसल भी पीली पड़ रही है। किसान मोर्चा के जिला प्रधान रवि सिंह जमवाल का कहना है कि अगर इसी तरह से क्षेत्र में बारिश होती रही तो जिन किसानों ने गेहूं की फसल को पंपसेट से पानी लगाया है उनको नुकसान हो सकता है।
किसान अपनी गेहूं की फसल में पानी जमा न होने दें, क्योंकि गेहूं की फसल को कम पानी की जरूरत होती है। ये बारिश कंडी क्षेत्र के लिए काफी लाभदायक है। हमारे क्षेत्र के लिए भी अभी तक तो ठीक है तो वहीं क्षेत्र के कुछ किसानों के खेतों में पानी जमा है। किसान की गेहूं की फसल पीली पड़ रही है। किसानों को चाहिए कि वह खेत से पानी निकालें और थोड़े दिन बाद यूरिया खाद का छिड़काव कर दें, ताकि गेहूं को पीला होने से बचाया जा सके। किसान नेता मोहन सिंह भट्टी, सुखदेव सिंह, भगवान चौधरी का कहना है कि फिर से बादल छा रहे हैं, जिससे हमारे क्षेत्र के किसानों को चिंता सता रही है कि अगर बारिश हो गई तो हमारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
मौसम के बिगड़े मिजाज ने किसानों को चिंता में डाला
गेहूं व पशु चारे पर पड़ रहा विपरीत असर
अरनिया। बीते करीब अठारह दिन से मौसम खराब रहने से आम जनजीवन अस्त व्यस्त होता जा रहा है। वहीं पशु चारे सहित गेहूं फसल पर भी विपरीत असर पड़ना शुरू हो चुका है। हालांकि इस बार गेहूं फसल येलोरेस्ट नामक बीमारी से बची हुई है।
राजन शर्मा, अंशु सैनी, जसबीर सिंह, मोहन लाल, बचन लाल व गुरदीप सिंह आदि क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बुआई के बाद खासतौर से इन दोनों फसलों पर पहले सूखे का संकट मंडराया हुआ था। उसके बाद इसी माह की चार तारीख को हुई हल्की बारिश से इन दोनों फसलों पर छाया सूखे का संकट भी दूर हो गया। मगर उसके बाद लगातार मौसम के बिगड़े रहने से न तो खिली धूप निकली और न ही हल्की बारिश व बूंदाबांदी से छुटकारा मिल सका, जिससे इन दोनों में जितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। खिली धूप न निकलने से नही हो सकी। किसानों के अनुसार अगर आने वाले दिनों में भी मौसम का ऐसा ही मिजाज रहा तो उत्पादन में काफी गिरावट बनी रहेगी, जिसका खामियाजा हम किसानों को भुगतना पड़ेगा।