फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहरों में इस साफ-सफाई से नाखुश किसानों में रोष व्यापत

विज्ञापन
डी - 10 नहर यहा अभी सफाई नही हो पाइ - फोटो : RSPURA
विज्ञापन
आरएस पुरा। उपजिले में नहरों की सफाई कराने की प्रक्रिया जारी होने पर सिंचाई विभाग की ओर से रणवीर नहर सहित माइनर नहरों की सफाई कराई जा रही है। किसानों का कहना है कि जहां तक मुख्य रणवीर नहर डी-10 नहर की सफाई कराने की बात है वहां कई स्थानों पर जेसीबी लगाए जाने के साथ मजदूर भी सफाई कर रहे हैं।
विज्ञापन

किसान धर्मपाल का कहना है कि सफाई के नाम पर ठेकेदारों से विभाग की मिलीभगत से करीब सात किलोमीटर नहर में खानापूर्ति की है। इसकी वजह से आने वाले दिनों में धान की रोपाई में दिक्कत आएगी। किसान नेता सुभाष दषगोत्रा का कहना है कि इस नहर की सफाई होने के बाद भी कई स्थानों पर अभी भी घास भरा हुआ है। बीच-बीच में करीब सौ-सौ मीटर के टुकड़ों को छुआ तक नहीं गया है। इससे गंदगी साफ तौर पर देखी जा सकती है। दषगोत्रा ने राज्य प्रशासन व विभाग के प्रति रोष जताते हुए कहा कि नहरों की सही तरीके से सफाई कराने के बाद पानी छोड़ा जाए। मात्रा लीपापोती करने पर न तो ऊपरी क्षेत्र के किसानों को सुचारु रूप से नहरी पानी की आपूर्ति होगी और न ही अंतिम टेल तक पानी पहुंच पाएगा।
रणवीर व माइनर नहरों के किनारों पर लोगों द्वारा पक्के शेड बनाकर अतिक्रमण कर रखा है। यही नहीं हर कोई व्यक्ति नहर में कूड़ा-करकट डालने पर नहर अब कूड़ेदान बन चुकी है। यही कारण है कि किसानों को कभी भी नहर का पानी समय पर नहीं मिलता है।
विज्ञापन

पूर्व सरपंच व किसान मोहिंद्र चौधरी का कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से कई पंचायतों को मनरेगा योजना के अंतर्गत सफाई कराने का जिम्मा दिया गया है। उन्होंने कहा कि 200 रुपये दिहाड़ी होने पर मनरेगा योजना के अंतर्गत नहरों की सफाई हो पाएगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दिसंबर में नहरों की सफाई करने के लिए बंद किया जाता है। सफाई का कार्य मार्च में आरंभ किया जाता है।
किसान थोडू राम चौधरी का कहना है कि लगभग 200 वर्ष पहले रणवीर नहर बनी थी, अब हालत यह है कि नहरों की सफाई के लिए न तो सरकार गंभीर है और न ही सिंचाई विभाग।
-----
इस समय लगभग मुख्य व माइनर नहरों का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। रह गए स्थानों को फिर से साफ कराया जा रहा है। देरी से नहरों की सफाई इसलिए कराई जाती है कि पानी छोड़ने पर भी नहरें बेहतर हालत में रहे। कई लोग नहरों में प्लास्टिक फेंक देते हैं, जिसके चलते पानी की गति में कमी आती है। विभाग की तरफ से नहरों में गंदगी फैलाने व किनारों पर अतिक्रमण करने पर कार्रवाई की जाती है, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
विज्ञापन

-शाशिर खजूरिया, एईई, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें