बांदीपोरा जिले के हाजिन इलाके में स्थानीय लोगों के लिए 18 नवंबर की रात इस कदर भयावह थी कि जिसका खौफनाक मंजर आज उनकी आंखों में जिंदा है। हाजिन जो कभी अपने खूबसूरत नजारों के लिए जाना जाता था लेकिन उस रात के बाद देश के सामने उसकी पहचान ही जैसे बदल गई हो।
हाजिन में 18 नवंबर की रात सुरक्षा बलों ने छह विदेशी आतंकियों को मार गिराया। जिसमें मुंबई (26/11) आतंकी हमले के गुनहगार जकीउर रहमान लखवी का भतीजा ओसामा भी शामिल था। पाक में बैठे आतंक के आकाओं को सुरक्षा बलों ने इतना बड़ा झटका दिया कि वह बौखला उठे।
वहीं, दूसरी ओर हाजिन की खूबसूरती की जगह देशभर में इसकी चर्चा आतंक के गढ़ के रूप में होने लगी। एक साथ छह पाकिस्तानी आतंकियों की मौजूदगी के बाद हाजिन में सुरक्षा एजेंसियों के ऊपर भी सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर इतनी पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद आतंकियों का गुट वहां पहुंचने में कैसे कामयाब हो गया।
अगर आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद अगर पूरे घटना क्रम पर नजर डाले तो त्राल के बाद आतंकियों ने हाजिन को ही अपने नए गढ़ के रूप में विकसित करने की कवायद जारी की है। हाजिन में कासो और एनकाउंटर तो अब जैसे यहां के लोगों के जीवन का हिस्सा सा चुका है।
बुरहान को त्राल में मारे जाने के बाद आतंकी हाजिन की ओर रूख करते हुए अब इसी को अपने नए गढ़ के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। जान कर अजीब लगेगा कि हाजिन एक समय में आतंकवाद विरोधी संगठन ‘इखवान’ का गढ़ हुआ करता था, लेकिन आज वही हाजिन पूरी तरह से आतंक के चपेट में है।
माना जाता है कि हाजिन से एलओसी की दूरी भी कोई खास नहीं है आतंकी जैसे तैसे सीमा पार करने के बाद उनकी अगली रणनीति का हिस्सा हाजिन में प्रवेश करने की होती है क्यों कि हाजिन उनके सुरक्षा की दृष्टि से काफी माकूल माना जाता है।
अब तक पत्थरबाजी की सबसे ज्यादा घटनाएं हाजिन में ही हुई हैं। सुरक्षा बलों के तलाशी अभियान चलाने के समय यहां के स्थानीय लोगों द्वारा पथराव शुरू कर दिया जाता है जिसका फायदा उठा आतंकी सुरक्षा बलों को चकमा दे फरार होने में कामयाब हो जाते है।