अधिकारियों ने बताया कि थैं-हीरानगर ट्रांसमिशन लाइन को रंजीत सागर बांध के पूरा होने तक तैयार कर लिया गया था, लेकिन जम्मू कश्मीर और पंजाब के बीच कई मुद्दों पर असहमति के चलते इस लाइन को बांध के साथ टैप नहीं किया जा सका था। इस ट्रांसमिशन लाइन के हीरानगर ग्रिड के साथ जुड़ने के बाद इंटरकनेक्टेड अन्य ग्रिड को भी बिजली सप्लाई जरूरत के समय उपलब्ध करवाई जा सकेगी।
वर्षों पूर्व हुए रंजीत सागर झील को लेकर पंजाब और जम्मू कश्मीर सरकार के बीच 20 फीसदी बिजली खरीद को लेकर हुआ समझौता सबसे हैरान करने वाला था। जम्मू-कश्मीर ने जिस समझौते पर वर्ष 1979 में हामी भरी थी, उसके अनुसार बांध से बीस फीसदी उत्पादन का हक जम्मू-कश्मीर का है, लेकिन यह हक बसबार रेट पर बिजली खरीद कर ही हासिल किया जा सकता है। हालांकि, हिमाचल सरकार ने समय रहते अनुबंध में सुधार करा लिया और वर्तमान में बसबार रेट पर हिमाचल के हिस्से की बिजली में से 4.6 फीसदी बिजली मुफ्त मिल रही है।