आतंकी संगठनों से जुड़ने वाले सरकारी मुलाजिमों को पुनर्वास योजना के तहत घर वापसी के बाद फिर से सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। जूनियर इंजीनियर के रूप में सरकारी नौकरी पाने वाले इरशाद अहमद भट की याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार ने उक्त फैसला दिया।
कोर्ट ने कहा कि आतंकी संगठन से जुड़ने वाले सरकारी मुलाजिमों को पुनर्वास योजना के तहत फिर सरकारी नौकरी पर बहाल न किया जाए। इरशाद भट ने आतंकी संगठन से जुड़ने के बाद आत्मसमर्पण किया था और पुनर्वास योजना के तहत फिर से सरकारी नौकरी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ता के अनुसार जम्मू कश्मीर सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों के पुनर्वास का वादा किया गया था। उसी आधार पर इरशाद भट ने एक सितंबर 2004 को पुलवामा के एसएसपी के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। उसने जूनियर इंजीनियर के रूप में नौकरी हासिल की थी।
सब डिवीजन किश्तवाड़ में तैनाती के दौरान वह मई 1999 से अचानक बिना सूचना के अनुपस्थित रहा। इस दौरान वह आतंकी संगठन से जुड़ गया। अक्तूबर 2004 में उसने पीएचई डिवीजन किश्तवाड़ में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को ज्वाइनिंग रिपोर्ट दी। उसे ज्वाइनिंग की भी अनुमति दे दी गई।