प्रशासन ने जीरो लाइन के तमाम गांवों को खाली करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रविवार को जीरो लाइन के तमाम गांवों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए छह राहत शिविर स्थापित कर दिए गए।
इससे पूर्व रविवार देर रात से ही लोग अपने स्तर पर ही रिश्तेदारों से लेकर सुरक्षित स्थानों पर स्थित मंदिरों में जान बचाने के लिए पहुंच गए। ग्रामीणों की मानें तो पाकिस्तान इससे पूर्व भी गोलाबारी करते रहा है, लेकिन इस बार के हालात दहशत का माहौल बनाने के बजाय आबादी वाले इलाकों को नुकसान पहुंचाने से प्रेरित लग रहा है।
जिला उपायुक्त सांबा, शीतल नंदा ने बताया कि सीमांत गांव के लोगों को वक्त पर सूचित कर दिया गया था। सांबा, रामगढ़, खनवाल, राजपुरा आदि स्थानों पर राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। लोगों को खाने और रहने की सुविधा दी जा रही है।
गांववासियों को राहत शिविर में पहुंचाने के लिए वाहन दिए गए। लेकिन कुछ लोग अपनी मर्जी से घर छोड़ कर नहीं गए। प्रशासन ने गोलाबारी की स्थिति से निपटने के इंतजाम किए हैं। राहत शिविरों में करीब एक हजार लोग मौजूद हैं।