जम्मू। डेयरी फार्म और भेड़ फार्म के लिए 40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे पशुपालक आजीविका से जुड़ सकेंगे। यह जानकारी जनजातीय कार्य विभाग के सचिव डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने पशु एवं भेड़पालन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में दी।
उन्होंने कहा कि प्रवासी आबादी के लिए मिनी भेड़ फार्म, दुग्ध गांव, डेयरी फार्म और टेंट की स्थापना जरूरी है। वर्ष की शुरुआत में समय पर विकास कार्यों को शुरू करने के लिए अगले वित्तीय वर्ष के लिए क्षेत्रीय योजना प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। जनजातीय मामलों के विशेष सचिव हारून मलिक और सलाहकार बोर्ड के सचिव मुख्तार अहमद चौधरी ने आजीविका योजनाओं के विभिन्न रूपों पर चर्चा की। बताया गया कि रियासी, डोडा, कठुआ, सांबा, राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा, अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा, गांदरबल, श्रीनगर और शोपियां जिलों में 750 मिनी शीप फार्म स्थापित किए गए हैं, जिससे 3000 की आबादी लाभान्वित हो रही है। यह योजना किश्तवाड़, उधमपुर, रामबन, बारामुला, बडगाम, बांदीपोरा और जम्मू जिलों को कवर करेगी। मिनी भेड़ फार्मों के लिए 15 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है।