कश्मीर में आगामी निकाय और पंचायती चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के लिए चुनौतियां अन्य पार्टियों की तुलना में ज्यादा बढ़ गई हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार स्वतंत्रता दिवस पर पुलवामा में भाजपा कार्यकर्ता शब्बीर भट की हत्या के बाद 25 अगस्त को भाजपा के महासचिव संगठन अशोक कौल और एमएलसी रमेश अरोड़ा व सोफी यूसुफ पर पुलवामा में पथराव की घटना के बाद से भाजपा को घाटी में अपनी गतिविधियों को चलाने पर मंथन करना पड़ रहा है।
2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा जम्मू और लद्दाख में तो जोरदार तरीके से जमीनी स्तर पर काम कर रही है, लेकिन कश्मीर में उसे ऐसा करने में समस्या पेश आ रही है। अनुच्छेद 35ए का मामला गरमाने और कश्मीर में अनुच्छेद 35ए के पक्ष में आवाज आने और भाजपा के अनुच्छेद के विरोध में खड़ा होने से भी कश्मीर में भाजपा के लिए चुनौती बढ़ी हुई है।
अनुच्छेद 35ए पर रियासत बंटी हुई नजर आ रही है। जम्मू में ज्यादातर इलाकों में अनुच्छेद का विरोध हो रहा है और कश्मीर में इसका समर्थन। ऐसे में आगामी चुनाव में भी अनुच्छेद पर पार्टियां वोट मांगने का काम करेंगी।