कश्मीर में लगातार करीब 36 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने से स्थानीय लोगों, प्रशासन और सरकार की नींद उड़ गई थी। इसे ध्यान में रखते हुए किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हर प्रयास शुरू किया जाने लगा, जिसके अंतर्गत केंद्र की ओर से मंगलवार को आठ एनडीआरएफ की टीमें कश्मीर घाटी भेजी गई।
जम्मू कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल सैयद जावेद मुज्तबा गिलानी ने बताया कि कश्मीर घाटी में बारिश के चलते पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए उनके द्वारा जम्मू कश्मीर पुलिस के अधिकारियों सहित जवानों को भी पूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। सभी दिन रात एक कर अपने-अपने काम में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को कश्मीर घाटी में बठिंडा और गाजियाबाद से एनडीआरएफ की कुल आठ टीमें पहुंची हैं, जिनमें से चार टीमों को श्रीनगर, जबकि दो-दो टीमों को दक्षिणी और उत्तरी कश्मीर में तैनात किया गया है। गिलानी ने यह भी बताया कि इन टीमों में एनडीआरएफ के करीब चार सौ जवान और 63 रबर की नाव हैं।
उन्होंने बताया कि पुराने अनुभव से सीख लेते हुए इस बार एनडीआरएफ की टीमें पूरी तरह से हर उपकरण से लैस हैं, जिनमें सैटेलाइट फोन आदि शामिल हैं। गौरतलब है कि सितंबर 2014 में कश्मीर में आई भीषण बाढ़ में बाकी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एनडीआरएफ ने भी अहम भूमिका निभाई थी।
बाढ़ पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित
रेवेन्यू विभाग के मंत्री जावेद मुस्तफा ने श्रीनगर में संभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर बारिश और बाढ़ से उत्पन्न हुई स्थिति पर जानकारी हासिल की। बैठक में जानकारी दी गई कि झेलम नदी और अन्य नालों में बाढ़ का पानी कम हो रहा है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा है, वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
वहां पर उनके रहने और खाने का पूरा इंतजाम किया गया है। मंत्री को जानकारी दी गई कि बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से समय रहते झेलम के उन स्थानों पर रेत के बोरों से पाट दिया गया है जिन स्थानों पर झेलम के तटबंधों में दरारें आने का अंदेशा था। श्रीनगर में बाढ़ पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
इस मौके पर मंत्री को बताया गया कि बाढ़ से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। एनडीआरएफ की आठ टीमें प्रशासन की मदद कर रही हैं। घाटी में राशन और अन्य चीजों की कमी नहीं है। 290270 कुंतल चावल, 45000 कुंतल चीनी और 49000 एलपीजी सिलेंडर गोदामों में मौजूद हैं।
फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज और श्रीनगर नगर निगम की ओर से क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंप सेट लगाए गए हैं। बैठक में अन्य लोगों के अलावा आईजीपी कश्मीर, जिला आयुक्त श्रीनगर, आरएंडवी, पीएचई और सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर मौजूद थे। मंत्री ने बाद में लादेन चढूरा का दौरा कर मृतकों के परिवारों से संवेदना प्रकट की।
सदन में भी उठा हाईवे का मुद्दे
विधान परिषद में नेशनल कांफ्रेंस के सदस्य डा. बशीर अहमद वीरी ने मंगलवार को ध्यान आकर्षण प्रस्ताव में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के फिर से बंद होने की तरफ सदन का ध्यान खींचा।
वीरी ने कहा कि हाईवे के आये दिन बंद होने के चलते कश्मीर का देश के अन्य हिस्सों से सड़क संपर्क कट जाता है और लोगों खासतौर से रास्तों में फंसे यात्रियों को भारी परेशानियों से जूझना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को हाईवे पर अस्थायी शिविर बनाने चाहिए, ताकि यात्रियों को खाने-पीने से लेकर ठहरने तक की सुविधा मिल सके।
परिवहन राज्य मंत्री अब्दुल गनी कोहली ने कहा कि बारिश और बर्फबारी के चलते जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे कई जगह पर पस्सियां गिरने से बंद हो गया है।
मंत्री ने कहा कि खराब मौसम और हाईवे बंद होने के चलते सरकार ने फंसे वाहन चालकों और यात्रियों के ठहरने और खाने-पीने की कई जगह पर व्यवस्था की है। सरकार की कोशिश है कि हाईवे को जल्द बहाल किया जाए।