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शहरीकरण: जम्मू महानगरीय क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के अधीन आएंगे हीरानगर के 65 गांव

Sat, 29 May 2021 01:42 PM IST
प्रशांत कुमार एस. खजूरिया, कठुआ

सार

जम्मू महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के दायरे में जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी व ऊधमपुर जिले का 2216.58 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आता है।
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कठुआ - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जम्मू महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधीन कठुआ जिले के हीरानगर का क्षेत्र भी शामिल होगा। इसमें हीरानगर के 65 गांव शामिल हो रहे हैं। जिनमें बुनियादी ढांचे से लेकर शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए विकास कार्यों पर फंड्स अब विकास प्राधिकरण की ओर से भी जारी किए जाएंगे। इसी कड़ी में हीरानगर में एक बस टर्मिनल और पार्किंग को बनाया जाना भी प्रस्तावित है। जिसके लिए डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

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जम्मू महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अंतगर्त जिले के हीरानगर से फेरू चक, टरंगोली, अर्जुन चक, सूबा चक, हीरानगर, बेलिया, रख सरकार हीरानगर, जंगी चक, चक रत्न, सनियाल, अल्लूचक, बासी जंवाल, डोलका, जल्ला चक, जांडी, ठूठे चक, डंडवाल, ज्वालू चक, भीडू चक, गूड़ा मुंडेयां, गूड़ा बालू, गूड़ा बेलदारां, गूड़ा, सतूरा, गरा, भैया, मेला, कट्टल ब्राह्मणा, मुट्ठी हरदों डूंगा, पंथाल, कूटा, कनाह, पट्टा रसाना, सैडा, सोहल, छन्न खत्रियां, सुक्खू चक, बेरी, छन्न मोरियां, गूड़ा मेहतेयां, धमयाल, सल्लन, रख सरकार सल्लन, ढल्ली, चजरथ, चक बलांडा, पटियाड़ी ब्राह्मणां, ढाल्ता, चक बानू, कसबा, चक दियाला, लंगरियाल, करवाल, बरमाल, छन्न रंगा, पथवाल, करियाड़ा, चड़वाल, छन्न दितयाल, कोड़ कसबा, खरड़, स्प्रैन, छपाकी कलां, छपाकी खुर्द, चक गंगा राम और गदियाल शामिल हैं। 

डीसी कठुआ राहुल यादव ने बताया कि जिले का हीरानगर क्षेत्र जम्मू महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अधीन आया है। बताया कि हीरानगर के लिए मोबिलिटी प्लान के तहत प्रपोजल मांगा गया था, जिसमें बस टर्मिनल और पार्किंग प्लेस का प्रपोजल बनाकर भेजा गया था। फिलहाल इसकी डीपीआर बनाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है। 
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प्रदेश के श्रीनगर और जम्मू महानगरीय क्षेत्रों में बीते साल फरवरी माह से ही 10 कनाल या उससे ज्यादा जमीन पर निर्माण कार्य के लिए महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरणों (एमआरडीए) से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। आवास एवं शहरी विकास विभाग की ओर से यह आदेश जारी किया गया था जिसमें सभी नगर समितियां, नगर परिषदें और विभिन्न परियोजनाओं को कार्यान्वित करने वाली संस्थाओं को निर्देश दिए गए थे कि संबंधित एमआरडीए की लिखित अनुमति के बिना 10 कनाल या उससे ज्यादा जमीन पर होने वाले निर्माण कार्य या परियोजना को मंजूरी न दें।

अधिकारियों के अनुसार 10 कनाल या उससे ज्यादा जमीन के इस्तेमाल से होने वाली किसी भी प्रकार की विकास गतिविधि, जिसका आसपास के इलाकों में ट्रैफिक, गतिशीलता और शहरी परिवेश पर असर होता है, की इजाजत देने से पहले एमआरडीए की लिखित अनुमति होनी चाहिए। यह कदम महानगरीय क्षेत्र में अनियोजित विकास को रोकने के लिए उठाया गया है। ज्ञात रहे कि तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अगुआई वाले प्रशासन ने जम्मू और कश्मीर महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम 2018 को लागू किया था। इसके आधार पर ही तीन जुलाई 2019 को इन दोनों महानगरीय क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र को अधिसूचित किया गया। 
 
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