जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा न होने से विद्यार्थियों, कारोबारियों से लेकर अन्य वर्गों को रोजमर्रा की कई परेशानियां हो रही थीं। जम्मू-कश्मीर के हालात की समीक्षा से लेकर नुकसान का आकलन करने आए संसदीय दल के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था।
ऑनलाइन कक्षाएं न होने से बच्चों के अभिभावक और ई-वे बिल के ऑनलाइन भुगतान न होने से परेशान कारोबारी विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहे थे। सात जनवरी को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में जल्द ही 4जी इंटरनेट बहाल किया जाएगा।
5 अगस्त को लगाई गई थी पाबंदी
अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर अगस्त 2019 में एहतियातन की गई सुरक्षा व्यवस्था के बीच 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई थी। इसके बाद सबसे पहले ब्रॉडबैंड को बहाल किया गया। बाद में जम्मू से 2जी सेवा बहाली की शुरुआत की गई।
हालात की समीक्षा कर कश्मीर में भी 2जी सेवा बहाल की गई। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 4जी इंटरनेट सेवा बहाली की संभावनाओं संबंधी निर्देश पर सरकार ने 16 अगस्त 2020 को उधमपुर और गांदरबल जिलों में 4जी इंटरनेट सेवा ट्रायल पर बहाल की।
आतंकी हमलों, देश विरोधी गतिविधियों की दी गई दलील
जम्मू-कश्मीर में डेढ़ साल तक हाई स्पीड मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी के लिए सरकार की ओर से सुरक्षा कारण बताए गए। गृह विभाग ने समय-समय पर हालात की समीक्षा कर आतंकी हमलों और देश विरोधी गतिविधियों पर अंकुश के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की पाबंदी को अनिवार्य बताया।
उमर अब्दुल्ला बोले- '4जी मुबारक
डेढ़ साल बाद जम्मू-कश्मीर में फोर जी इंटरनेट सेवा बहाल होने के बाद उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर कश्मीर के लोगों को मुबारक दी। उन्होंने लिखा, '4जी मुबारक! अगस्त 2019 के बाद पहली बार पूरे जम्मू कश्मीर को 4जी इंटरनेट डाटा मिल रहा है। देर आए दुरुस्त आए।'