बीते दो हफ्तों में एलओसी से घुसपैठ के प्रयास तेज किए गए हैं। ये प्रयास अगले एक महीने में बड़े स्तर पर बढ़ सकते हैं क्योंकि नवंबर के पहले सप्ताह में कश्मीर में बर्फबारी शुरू हो जाती है। इससे आतंकियों की घुसपैठ के रास्ते फरवरी तक बंद रहते हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर में भारी नुकसान होने के बावजूद पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराने से बाज नहीं आ रहा है। वह बर्फबारी से पहले पीओके से 40 आतंकियों की घुसपैठ कराने की फिराक में है।
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बीते दो हफ्तों में एलओसी से घुसपैठ के प्रयास तेज किए गए हैं। ये प्रयास अगले एक महीने में बड़े स्तर पर बढ़ सकते हैं क्योंकि नवंबर के पहले सप्ताह में कश्मीर में बर्फबारी शुरू हो जाती है। इससे आतंकियों की घुसपैठ के रास्ते फरवरी तक बंद रहते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के आतंकी संगठन रास्ते बंद होने से पहले आतंकियों से अधिक से अधिक घुसपैठ कराना चाहते हैं।
खुफिया एजेंसियों के पास इसके पुख्ता इनपुट पहुंचे हैं। खासकर राजोरी, पुंछ, बारामुला और कुपवाड़ा जिलों में। इन चारों जिलों से अगले एक महीने में 40 आतंकियों के घुसपैठ कराने की साजिश रची जा रही है। इन जिलों में सीमा पार पीओके में 7 से 8 लांचिंग पैड पर आतंकी तैयार बैठे हैं। कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर, पुंछ के कृष्णा घाटी, मेंढर सेक्टर, राजोरी के केरी, नौशेरा, सुंदरबनी और बारामुला में भी कुछेक जगहों पर आतंकी मौजूद हैं। ये आतंकी लश्कर-ए-ताइबा के संगठन टीआरएफ और जैश-ए-मोहम्मद के हैं। मौजूदा समय में आतंकी संगठनों के पास कश्मीर में आतंकियों का स्थानीय कैडर नहीं है। इसलिए पाकिस्तान वहीं के आतंकियों को ट्रेनिंग देकर भारत में भेजने की फिराक में है।
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आईबी से भी घुसपैठ के प्रयास बढ़ने की आशंका
बता दें कि बीते दिनों भारी बारिश और बाढ़ से अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के आरएस पुरा, सुचेतगढ़, परगवाल, कानाचक, अखनूर, हीरानगर, सांबा और रामगढ़ सेक्टर में सरहदी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर फेंसिंग क्षतिग्रस्त हुई है। इससे आतंकियों की घुसपैठ बढ़ने की आशंका है। इन इलाकाें में आतंकियों की घुसपैठ का एक बड़ा ओजी नेटवर्क भी सक्रिय है जो पूर्व में भी घुसपैठ कराने में मदद करता रहा है।