लद्दाख में पंचायत और नगर निकाय दोनों चुनाव घोषित हो चुके हैं। लेह और कारगिल नगर निकाय चुनाव में कुल 3,365 मतदाता वोट डालेंगे। दोनों की नगर समितियों के चुनाव आगामी 21 नवंबर को होंगे। इसके साथ ही एलएएचडीसी चुनाव के लिए राज्य चुनाव आयोग और चुनाव प्राधिकरण के बीच समन्वय बनाने के लिए रिग्जिन स्पलगोन को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
रिग्जिन वर्तमान में अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (एडीडीसी) और एकीकृत बाल विकास योजना यानी आईसीडीएस के कार्यक्रम अधिकारी हैं। लेह। लद्दाख में लेह और कारगिल नगर समितियों के आम चुनाव आगामी 21 नवंबर को होंगे। लेह और कारगिल दोनों में मिलाकर कुल 38 वार्ड हैं। इनमें से 21 वार्ड लेह में हैं। वहां 2,720 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। वहीं, कारगिल के 17 वार्डों में 645 वोटर वोट डालेंगे।
जानिए चुनाव से जुड़ीं अहम तारीखें
चुनाव जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 और जम्मू-कश्मीर नगर समिति (निर्वाचन) नियम, 2003 के प्रावधानों के तहत होंगे। निर्वाचन अधिकारी राहुल शर्मा की ओर से पहले ही चुनाव संबंधी कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है। इसके अनुसार नगर समितियों के चुनाव की अधिसूचना आगामी 29 अक्तूबर को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पांच नवंबर रखी गई है। नामांकन पत्रों की जांच छह नवंबर को की जाएगी। उम्मीदवारी आगामी नौ नवंबर तक वापस ली जा सकेगी। इसी दिन चुनाव चिन्ह भी आवंटित किए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को आगामी 30 नवंबर तक पूरा किया जाएगा।
एलएबी और केडीए ने फिर उठाए 371 और 35-ए के मुद्दे
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने एक बार फिर अनुच्छेद 371 और 35-ए का मुद्दा उठाया है। इन दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने लद्दाख के लोगों की सांविधानिक सुरक्षा का मसला उठाते हुए कहा कि वह चुनाव के पीछे छिप गया है। गृह मंत्रालय संग बैठक को भी लगातार टाले जाने पर उन्होंने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए। एलएबी और केडीए लंबे समय से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
इसके साथ ही वे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात लगातार उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र उनकी मांगों पर ध्यान न देकर लद्दाख के लोगों पर अपने फैसले थोप रही है। एलएबी के को-चेयरमैन छेरिंग दोरजे ने अमर उजाला से कहा कि हाल ही में केंद्र सरकार और लद्दाख के नेताओं के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन गृह मंत्रालय के प्रस्तावित मसौदे और लद्दाख के प्रतिनिधियों की मांगों के बीच काफी मतभेद हैं। उनके अनुसार इन मांगों को लेकर एक ड्राफ्ट भी उन्होंने गृह मंत्रालय को सौंपा है, लेकिन उस पर चर्चा नहीं की जा रही। केंद्र अपने वादों से पीछे हट रहा है।
स्थानीय प्रशासन के जमीन से जुड़े नियमों और नीतियों में बदलावों पर भी इन दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। कहा कि 2019 तक जम्मू-कश्मीर में 35-ए लागू था। इसका हिस्सा होने के नाते लद्दाख को भी विशेष दर्जा हासिल था। उसके हटाए जाने के बाद लद्दाख को बगैर विधायिका का केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इससे केंद्र की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।