शिक्षा विभाग में अव्यवस्था का आलम है। इसी कारण दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में स्थित स्कूलों में स्टाफ की कमी है, जबकि शहर के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से ज्यादा शिक्षकों की संख्या है। नियम अनुसार 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए, लेकिन जम्मू जिले के शहरी इलाकों में विद्यार्थियों की जरूरत से कहीं ज्यादा शिक्षक तैनात किए गए हैं।
इन स्कूलों में शिक्षा विभाग एक विद्यार्थी पर हजारों रुपये की राशि खर्च कर रहा है। यह जानकारी शनिवार को संघर्ष आरटीआई मूवमेंट के संयोजक बलविंद्र सिंह ने दी। बलविंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार सरकारी स्कूलों में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक नियुक्त किया जाता है।
उनको आरटीआई दायर करके जानकारी मिली की जम्मू जिले में स्थिति कुछ और है। ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों में 300 के करीब विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए दो या फिर तीन शिक्षक नियुक्त किए गए हैं, जबकि शहर में प्राइमरी स्कूल पक्का डंगा में छह विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए चार शिक्षक, मिडिल स्कूल कच्ची छावनी में 66 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए आठ शिक्षक हैं।
सबसे हैरानी तो मिडिल स्कूल बीसी रोड को देखकर हुई। जहां 25 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 25 शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति अन्य सरकारी स्कूलों की भी है। इन स्कूलों में स्टाफ की संख्या को देखकर साफ पता चलता है कि शिक्षा विभाग एक विद्यार्थी पर जरूरत से कहीं अधिक राशि खर्च कर रहा है, जबकि इन शिक्षकों की जरूरत उन स्कूलों में है, जहां विद्यार्थी ज्यादा स्टाफ कम है।