विधानसभा सत्र के आखिरी दिन बिजली समस्या को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष इस मुद्दे पर मुखर रहा।
सदस्यों के 24 घंटे बिजली सप्लाई की मांग पर सरकार की ओर से कहा गया कि मौजूदा संसाधनों में 24 घंटे सप्लाई कर पाना मुश्किल है।
विधानसभा में सदस्यों का कहना था कि बिजली विभाग का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। कई इलाकों में सप्ताह भर तक बिजली नहीं रहती है। ट्रांसफर जले पड़े हुए हैं। रिसीविंग स्टेशन का काम रूका पड़ा है।
इसके साथ ही अघोषित कटौती से भी लोग आजिज आ गए हैं। सदस्यों की बात सुनने के बाद प्रभारी मंत्री ने कहा कि बिजली ढांचे को चुस्त दुरुस्त बनाने के लिए पैसे की जरूरत है।
फंड की कमी की वजह से यह काम नहीं हो पा रहा है। मौजूदा संसाधनों में 24 घंटे और सातों दिन बिजली सप्लाई कर पाना संभव नहीं है।
उन्होंने सदन को बताया कि जिन इलाकों में मीटर नहीं है वहां अघोषित कटौती करनी पड़ रही है। लेकिन जहां मीटर लगे हुए हैं वहां कभी कभार यह दिक्कत आ रही है।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार के प्रयास कि ए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।