अमर उजाला ने जो आशंका जताई थी वह सही साबित हुई। बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को संवेदनशील पाकिस्तान बॉर्डर और आसपास के जिलों में बसाने की साजिश का बड़ा पर्दाफाश रविवार को हुआ। सुरक्षा एजेंसियों ने रामबन जिले के बनिहाल में रविवार शाम करीब 6:30 बजे जांच के दौरान 21 बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लिया। इनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सत्यापन में किसी के भी पास भारत में वैध प्रवेश अथवा यहां रहने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश व नेपाल से भी जुड़ाव मिला है। गोरखपुर, देवीपाटन व लखनऊ मंडल में घुसपैठ कराने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।
(इनमें छह नाबालिग हैं। सबसे छोटा बच्चा मात्र दो वर्ष और सबसे बड़ा नाबालिग 17 वर्ष का है।)
घुसपैठियों से सुरक्षा एजेंसियों के सवाल
सबसे बड़ा सवाल...सीमा से बनिहाल तक कोई नहीं रोक पाया?
जांच का सबसे अहम पहलू यह होगा कि क्या ये सभी लोग अपने स्तर पर भारत पहुंचे या फिर इनके पीछे मानव तस्करी अथवा घुसपैठ कराने वालों का कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि सीमा पार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और कश्मीर तक पहुंचाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। यदि यह नेटवर्क सामने आता है तो जांच का दायरा केवल इन 21 लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इस सब के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बांग्लादेश सीमा पार कर ये बनिहाल तक पहुंच गए और कोई इन्हें रोक नहीं पाया।