चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए एसिड कांड की पीड़ित युवती को इलाज के लिए दो लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए। खंडपीठ ने कहा कि केस के मुआवजे की जब घोषणा की जाएगी तो उस वक्त इस राशि को उसमें समायोजित कर लिया जाए।
खंडपीठ ने सरकार को आदेश में कहा कि फैसले की कापी मिलने के दो सप्ताह के अंदर राशि उपलब्ध करवाई जाए, ताकि वह अपना इलाज करवा सके। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया था कि मई 2012 को बडयाल ब्राह्मणा में एसिड की घटना से बुरी तरह घायल युवती को इलाज के लिए सरकार दो आदेश दिए जाएं।
पुलिस केस के अनुसार 26 मई 2012 को पीड़ित युवती ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि बुटीक में काम करने के बाद वह अपने पिता के साथ रोजाना की तरह घर लौट रही थी। जब वह आरएस पुरा सीएचसी के गेट के पास पहुंची, तो आरोपी युवक ने उसका रास्ता रोका और शादी करने का प्रस्ताव दिया।
उसके इंकार करने पर युवक ने उसकी जान लेने की नीयत से उसके ऊपर एसिड फेंका। युवती के बयान पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ आरपीसी की धारा 307, 341 के तहत मामला दर्ज किया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि घटना में युवती का शरीर बुरी तरह झुलस गया है और उसका जम्मू और दिल्ली में लगातार इलाज चल रहा है।
वकील ने तर्क में कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने इसी तरह के केस में दस लाख रुपये अंतरिम मुआवजे के रूप में दिया था। दलील में कहा गया कि सरकार को तत्काल उक्त राशि प्रदान करने के आदेश दिए जाएं और जब याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए 50 लाख रुपये मुआवजे का फैसला हो तो उसमें उसे एडजस्ट कर लिया जाए।
जेएनएफ