जम्मू कश्मीर में पिछले साल पथराव की घटनाओं में 2019 की तुलना में 87.13 प्रतिशत की कमी आई। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया कि राज्य में 2019 में पथराव की 1999 घटनाएं हुईं। इनमें 1193 घटनाएं केंद्र द्वारा पांच अगस्त को पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने की घोषणा के बाद घटीं।
डीजीपी ने बताया कि 2020 में पथराव की 255 घटनाएं घटीं, जो 2019 की तुलना में 87.31 प्रतिशत की गिरावट है। इससे पहले 2018 और 2017 में पथराव की क्रमश: 1458 और 1412 घटनाएं दर्ज की गईं। 2016 की पथराव की घटनाओं से तुलना करें तो 2020 में इस तरह की घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं की बाढ़ आ गई थी। इस साल 2653 मामले दर्ज किए गए थे। 2015 में 730 घटनाएं पत्थरबाजी की हुईं।
पत्थरबाजी की सबसे खराब स्थिति वर्ष 2010, 2016 व 2019 में रही। डीजीपी ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। 2021 का संकल्प है कि राज्य में शांति तथा सामान्य माहौल को और बेहतर बनाया जाए।
2000 के दशक के मध्य में पत्थरबाजी हो गई आम
2000 के दशक के मध्य में आतंकवाद में कमी आने के बाद प्रदर्शनों के दौरान पत्थरबाजी आम हो गई। यह ट्रेंड 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन से है। उस समय सेना के एक टॉप कमांडर ने कहा था कि पत्थरबाजी प्रदर्शन आतंकवाद है, जिसमें लोग सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं। उन्हें पता होता है कि सुरक्षा बल पत्थरबाजों पर बंदूक नहीं चला सकते।