रणजीत सागर बांध परियोजना के प्रभावितों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। प्रभावितों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए गठित थीन डैम प्रोजेक्ट ओस्ती कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार जिला प्रशासन से मिलकर अपना रुख साफ कर दिया है।
कोर कमेटी सदस्यों ने दो टूक कहा कि यदि जल्द ही उन्हें मुआवजा और प्रावधान के तहत रोजगार की सुविधा नहीं दी गई तो हजारों की संख्या में प्रभावित परिवारों को आंदोलन का रास्ता पकड़ना होगा। जिला प्रशासन ने 20 फरवरी को प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम फैसले का भरोसा दिया है।
थीन डैम प्रोजेक्ट ओस्ती कमेटी के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह ने कहा कि परियोजना के लिए पंजाब सरकार ने लोगों से भूमि लेने का काम तीन दशक पहले शुरू कर दिया था, लेकिन अधिकांश परिवारों को न तो उचित मुआवजा दिया गया, और न ही रोजगार। रणजीत सागर बांध से बिजली पैदा की जा रही है, जिसका पंजाब सरकार लाभ उठा रही है। स्थानीय लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
अध्यक्ष सहित वरिंदर सिंह, सुदेश कुमार, गफूर अहमद, सतपाल सिंह, पंकज कुमार ने कहा कि उचित मुआवजे की राशि और रोजगार के लिए पंजाब सरकार ने जम्मू कश्मीर सरकार के साथ लिखित में समझौता किया था।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार अपने वादे से लगातार मुकर रही है या फिर लिखित शर्तों पर अमल में आनाकानी कर रही है। यहीं नहीं, जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से भी बांध प्रभावितों के लिए जोर नहीं डाला जा रहा है।
यही वजह है कि वर्ष 1986 में ली गई भूमि के प्रभावितों को 29 वर्ष बाद भी राहत नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने 20 फरवरी को प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम फैसले का भरोसा दिलाया है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो वह बिना देरी किए आंदोलन शुरू कर देंगे।