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विधानसभा में फफक पड़े उमर अब्दुल्ला

Tue, 05 Mar 2013 11:48 PM IST
जम्मू/राघवेन्द्र नारायण मिश्र
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सुरक्षा बलों की गोली से बारामूला में एक युवक की मौत ने मंगलवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की तकरीर की दिशा ही बदल दी।
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राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने के लिए तैयारियों के साथ सदन में पहुंचे उमर को यह पता नहीं था कि हालात उनके भाषण का मजमून ही बदल देंगे।

मुख्यमंत्री ने अपना संबोधन शुरू किया तो कुछ देर के लिए ठिठक गए। जैसे जुबान उनका साथ नहीं दे रही हो। उनकी आंखें नम हुईं और गला भर आया। मुख्यमंत्री फफक कर रो पड़े।

सिर नीचे झुकाए उन्होंने तकरीर शुरू की तो राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के उत्तर को उसमें जगह ही नहीं मिल पाई। मुख्यमंत्री ने परंपरा के निर्वाह की औपचारिकता अपने भाषण के अंत में पूरी करते हुए राज्यपाल को उनके अभिभाषण के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
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पूरे संबोधन में मुख्यमंत्री कभी तल्ख नजर आए, कभी आक्रामक तो कभी भावुक। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ओहदा उन्हें विरोध के उस तरीके की इजाजत नहीं देता जिसे विपक्ष अपनाता है लेकिन युवक की मौत से वह भी बेहद दुखी हैं।

उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि घटना की पूरी तहकीकात कराई जाएगी और पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाया जाएगा। ऐसी घटनाएं दुखद हैं। उमर ने अपनी बेबसी को भी सदन से साझा किया।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को सियासी फायदे से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने संकेतों में यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं पीडीपी के शासनकाल में ज्यादा हुईं लेकिन उन्हें गिनाने का कोई फायदा नहीं है।

अपने भावुक संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के बाद पैदा हुए माहौल के बाद सड़क, अस्पताल, शिक्षा और विकास के अन्य क्षेत्रों में सरकार की उपलब्धियों पर फिलहाल बात नहीं की जा सकती।

जादूगर नहीं पर सुधरे हैं हालात
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कोई जादूगर नहीं हैं फिर भी हालात सुधारने की कोशिशें हुईं हैं और उनके बेहतर नतीजे भी आए हैं। बावजूद इसके कई बार वह खुद को थका महसूस करते हैं।

ऐसी घटनाओं पर सियासी फायदे के लिए सदन में माइक फेंकने और वाकआउट करने की विपक्षी रणनीति को भी उमर ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उनके भी दो बेटे हैं।

किसी भी निर्दोष की जान जाना गलत है लेकिन किसी सदस्य द्वारा इसे लेकर स्पीकर से दुर्व्यवहार भी गलत है। यह परंपरा ठीक नहीं। हर चीज उनके हाथ में नहीं है। काश हर चीज उनके हाथ में होती।

दैनिक मजदूर से की खुद की तुलना
मुख्यमंत्री ने खुद को एक दैनिक मजदूर की तरह बताया जो पीड़ितों के आंसू पोंछने की कोशिश करते हैं। दैनिक मजदूर के बजाए अगर खुद को स्थायी मुलाजिम समझा तो उनमें और किसी राजा में कोई अंतर नहीं रह जाएगा ।
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परेशानी भरी लगती है कुर्सी
उमर ने विपक्षी दल पीडीपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जिस कुर्सी के लिए बेचैन हैं, वह कुर्सी उन्हें परेशानी भरी लगती है। मुख्यमंत्री ने केंद्र और सुरक्षा बलों को संयमित अंदाज में घेरने की कोशिश की लेकिन घटना को लेकर मुल्क को कोसने की नीति को भी गलत बताया।
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