संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल को फांसी और उसके शव को वापस कश्मीर लाने की मांग पर राज्य विधानसभा में पेश तीन स्थगन प्रस्तावों पर कांग्रेस फंस गई है।
राज्य विधानसभा के स्पीकर मुबारक गुल ने अफजल मुद्दे पर सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस, सीपीएम और विपक्षी दल पीडीपी के प्रस्तावों को स्वीकार कर आगामी सोमवार को सदन में चर्चा का संकेत दिया है। लिहाजा, अब कांग्रेस ने अफजल मुद्दे को काउंटर करने की रणनीति बनाना शुरू कर दी है। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में साझा सरकार की प्रमुख घटक है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेता और डिप्टी सीएम तारा चंद ने इस सिलसिले में पार्टी के मंत्रियों और विधायकों से बैठकें शुरू कर दी है। शनिवार को हुई बैठक में जम्मू डिवीजन से संबंधित ज्यादातर कांग्रेसी विधायकों और मंत्रियों ने अफजल पर सदन में लंबित प्रस्तावों पर चिंता जाहिर की।
कांग्रेस नेताओं का मत था कि सुप्रीमकोर्ट और राष्ट्रपति के फैसले पर केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अमल किया है। इस स्थिति में सदन में अफजल को फांसी पर चर्चा के लिए पेश किए प्रस्तावों के मंजूर होने पर कांग्रेस की स्थिति खराब होगी।
सूत्रों ने बताया कि डिप्टी सीएम ने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष प्रो. सैफुद्दीन सोज, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मोहन प्रकाश और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद को स्थिति से अवगत करा दिया है। मोहन प्रकाश इस सिलसिले में पार्टी हाईकमान से चर्चा कर इस मुद्दे पर सदन में पार्टी के स्टेंड पर प्रदेश कांग्रेस नेताओं को आगामी सोमवार से पूर्व ही स्पष्ट करेंगे। रविवार को जम्मू संभाग के कांग्रेसी मंत्रियों और विधायकों की दोबारा दोपहर में बैठक होगी।