10 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण, बिजली ढांचे में आएगा सुधार
50 हजार की आबादी को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। बर्फवारी से प्रभावित रहने वाली पहाड़ी तहसील पंचैरी के दूरदराज इलाकों में बिजली ढांचे में सुधार के लिए बिजली विभाग की तरफ से 10 करोड़ की लागत से कोटला में 33केवीए सब स्टेशन का निर्माण जारी है। यह कार्य अंतिम चरण में है। वर्तमान में इसका अंतिम निरीक्षण किया जा रहा है। इसके कार्यरत होने के बाद जहां बिजली ढांचे में सुधार होगा वहीं, करीब 50 हजार की आबादी को लाभ मिलेगा।
प्रधान मंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के तहत लगभग 10 करोड़ की लागत से बनने वाले इस रिसीविंग सब स्टेशन का काम लगभग एक साल पहले मार्च 2023 के आसपास शुरू किया गया था। बिजली विभाग ने इसपर काफी तेज गति से काम करते हुए इसे एक साल के भीतर ही कंप्लीट कर लिया है। सब स्टेशन के बनने से पंचैरी, कोटला, लांदर, कारचा, धनोता, सदोता बधोता, गलियोत, सुमन, चुलना और कुलटैड के इलाकों की लगभग 50 हजार आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत यहां पट्ठी से कोटला के बीच एक नई 33 केवीए लाइन बिछाई गई है और सब स्टेशन तैयार किया गया है। इससे संबंधित इलाकों में बिजली कटौती और लो वोल्टेज की समस्या दूर होगी। सब स्टेशन बनने से स्थानीय लोग काफी खुश हैं। उनका कहना है कि पहले उनके इलाके में पट्ठी सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति होती थी। स्टेशन काफी दूर होने के कारण कम वोल्टेज की समस्या रहती थी। मौसम बिगड़ने पर बिजली गुल हो जाती थी। लेकिन अब कोटला सब स्टेशन बनने से प्रमुख समस्याओं को समाधान हो जाएगा।
प्रधान मंत्री विकास पैकेज (पीएमडीपी) के तहत बनाए जा रहे इस सब स्टेशन से 50 हजार आबादी को सीधा लाभ होगा। यहां लोगों को बिजली कटौती और लो वोल्टेज जैसी गंभीर समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह बर्फबारी वाले इलाके हैं। मौसम बदलते ही कई-कई दिन तक बिजली गुल रहती है। बिजली कर्मियों को भी मरम्मत करने में काफी परेशानी होती है। लेकिन कोटला स्टेशन बनने से बिजली ढांचा मजबूत होगा।
- जीवन शर्मा, पूर्व बीडीसी चेयरमैन, पंचैरी
कोटला सब स्टेशन का प्रारंभिक काम पूरा कर लिया गया है और अभी अंतिम निरीक्षण जारी है। मई के अंतिम सप्ताह तक यह फूल चार्ज होकर काम शुरू कर देगा। इसके बनने से संबंधित इलाकों की 70 से 80 प्रतिशत तक बिजली कटौती की समस्या दूर होगी और लो वोल्टेज की परेशानी भी खत्म हो जाएगी।
- सैयद आलम डार, परियोजना अधिकारी