उधमपुर। मासिक वेतन बढ़ाने और नियमित करने की मांग को लेकर आशा वर्कर्स ने सोमवार को टाउन हाल के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार की गलत कार्यप्रणाली के कारण उनकी परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अगर सप्ताह तक मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो कामछोड़ हड़ताल करने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
जिले के विभिन्न हिस्सों से आशा वर्कर्स मंगलवार को टाउन हाल के बाहर एकजुट हुई, जहां सभी ने सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के बैनर तले दोपहर के समय सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार की तरफ से उनके लगातार धोखा किया जा रहा है। सरकार व प्रशासन की तरफ से आशा वर्कर्स से सुबह से लेकर शाम तक काम करवाया जा रहा है। हालात यह है कि उनको खाना खाने का भी समय नहीं मिलता है, लेकिन वेतन के नाम पर केवल दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। महंगाई में दो हजार में गुजारा नहीं हो सकता है। कोविड को लेकर भी डेढ़ वर्ष से उनसे काम करवाया जा रहा है।
इसके लिए उनको केवल एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जब कोई नया सर्वे करना होता है तो काम उनको सौंपा जाता है। अधिकारी ऐसी के कमरों से आदेश जारी कर देते हैं। करीब छह माह से सभी वेतन बढ़ाने और सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। उनकी मांग है कि एक आशा वर्कर्स को कम से कम 21 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए और सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। वेतन बढ़ने के बाद ही उनकी आर्थिक परेशानी दूर हो सकती है। मौजूदा समय में हालात यह बन गए हैं कि उनके पास परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसा नहीं है। अगर सप्ताह तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया तो वह कामछोड़ हड़ताल के लिए मजबूर हो जाएंगी।