नवरात्र महोत्सव पर निकाली गई झांकी का दृश्य।
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नवरात्र महोत्सव के उपलक्ष्य पर रविवार को निकाली शोभायात्रा का दृश्य अलौकिक था। एक ओर जहां धार्मिक झांकियां माहौल को भक्तिमय बना रही थी तो दूसरी ओर डुग्गर संस्कृति पर आधारित झांकियां देश के कोने-कोने से आने वाले माता वैष्णो देवी के भक्तों को यहां की संस्कृति से रूबरू करवा रही थीं। जैसे-जैसे महोत्सव आखिरी चरण में पहुंच रहा है, हर रोज निकाली जाने वाली झांकियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है।
रविवार की शोभायात्रा की धार्मिक झांकियों में माता महागौरी, ज्वाला ज्योति, रावण वध, सुग्रीव दरबार, अशोक वाटिका, राधा कृष्ण आदि के दृश्य शामिल थी, जबकि डुग्गर संस्कृति की झांकियों में राजा मंडलीक और कालीवीर, लामा-फेरे, फिरदी पजेकी के दृश्य दिखाए गए थे।
इन झांकियों के साथ कुड नृत्य, उड़ी, मणिपुरी, पहाड़ी, हिमाचली आदि नृत्यों की प्रस्तुति महोत्सव का अहसास करवा रही थी। सबसे आखिर में पिंडी स्वरूप की झांकी थी, जिस पर भक्त प्रसाद ग्रहण कर शोभा यात्रा के साथ आगे बढ़ रहे थे। यह शोभा यात्रा एशिया चौक से शुरू होकर मुख्य बाजार, अप्पर बाजार, चिंतामणि, डाक बंगला, बाण गंगा मार्ग से होते हुए मुख्य बस स्टैंड पर समाप्त हुई।