डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में तीन अन्य जिलों के मरीजों का भी सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। करीब चार लाख आबादी पर केवल उधमपुर जिले के अस्पताल में ही एक महिला रेडियोलॉजिस्ट है।
स्थानीय होने के कारण वह अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही हैं। डोडा, रामबन, किश्तवाड़ जिले में भी अगर किसी मरीज का सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड करना होता है तो उन्हें उधमपुर जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
एंबुलेंस का खर्चा भी बढ़ जाता है। जबकि कई मरीज प्राइवेट गाड़ियां कर उधमपुर पहुंचते हैं। जिले में मौजूद एकमात्र डॉक्टर अगर छुट्टी पर चला जाए तो इन मरीजों को इंतजार करना पड़ता है या फिर जम्मू जाकर अपना इलाज करना पड़ता है।
हाईवे पर भी अगर कोई दुर्घटना हो जाए तो उन मरीजों को भी जिला अस्पताल में भेजा जाता है। जबकि जिले में मौजूद ब्लाक अस्पतालों के मरीजों को भी छोटी से छोटी बीमारी के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
मुद्दा आला अधिकारियों के समक्ष उठाया
अक्सर डोडा, रामबन और किश्तवाड़ के मरीज यहां सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं। अक्सर अस्पताल में भीड़ रहती है। मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पहले से ही यहां डाक्टरों की कमी है। मूल सुविधाएं, इमारत और मशीनें मौजूद हैं, पर उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। उनका दावा है कि डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए कई बार मुद्दा आला अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। कम संख्या होने के बावजूद डॉ. अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं।
-डॉ. अरुण शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी