चिनैनी। तहसील में 13 जून से सुद्धमहादेव मेले का आयोजन होने जा रहा है। देशभर से हर वर्ष हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने यहां पहुंचते हैं। इसके लिए प्रशासन ने लगभग तैयारियां पूरी कर ली हैं। बाकी का काम जारी है।
सुद्धमहादेव मेले के लिए दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में जुटे हैं। जबकि चौगान मैदान पर भी लगने वाले झूलों के लिए सफाई होने लगी है। वहीं, पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि मेले को दौरान जाम की समस्या उत्पन्न न हो। सड़क किनारे पड़ा सामान भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
दूसरी ओर मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के इंतजाम कर लिए गए हैं। यहां ऐतिहासिक मंदिर में भगवान शिव की प्राचीन मूर्ति है। स्थानीय बुजुर्गों की मानें तो एक किमी दूर एक गांव में किसान को हल चलाते हुए यह मूर्ति मिली थी। उन्होंने बताया कि किसान जब हल चला रहा था तो हल चलाते चलाते जमीन से खून निकलने लगा। इससे किसान डर गया। जब उसने जमीन खोद कर देखा तो जमीन में भगवान शिव की एक सुंदर मूर्ति मिली। उसे उठाकर वह चिनैनी के राजा के पास लाने लगा। किसान जब सुद्धमहादेव पहुंचा तो उसने विश्राम करने के लिए मूर्ति जमीन पर रखी। बाद में जब वह मूर्ति उठाने लगा तो मूर्ति उससे नहीं उठी।
किसान ने चिनैनी के राजा को बताया तो राजा भी अपने सिपाहियों के साथ सुद्धमहादेव पहुंचा और मूर्ति उठाने का प्रयास करने लगा। जब उससे भी मूर्ति नहीं उठाई गई तो वहीं मंदिर का निर्माण कर दिया गया। कहा जाता है कि इस मंदिर में जो कामना की जाए, वह पूरी हो जाती।
-------
तीन टुकड़ों में बंट गया त्रिशूल
सुद्धमहादेव मंदिर में भगवान शिव का वह त्रिशूल है, जिससे उन्होंने एक राक्षस का अंत किया था। वह तीन टुकड़ों में वहां पड़ा हुआ है। बताते हैं कि राक्षस भी भगवान शिव का भक्त था। मानतलाई से माता पार्वती गौरीकुंड में स्नान के लिए जाती थीं, और सुद्धमहादेव में भगवान शिव की पूजा करती थीं। एक दिन राक्षस ने माता पार्वती को देखा और उन्हें डराने की कोशिश की। डर के मारे माता ने भगवान को पुकारा।
तभी भगवान ने कैलाश पर्वत से अपना त्रिशूल फेंका जो राक्षस को लगा। इस दौरान वह राक्षस ओम नम शिवाय का जाप करने लगा। यह सुनकर भगवान ने राक्षस को दर्शन दिए, और वर मांगने को कहा। राक्षस ने वर मांगा कि इस जगह का नाम उसके व भगवान के नाम से चलता रहे। भगवान तथास्तु कह कर अंतर्ध्यान हो गए। सुद्धमहादेव मंदिर में तीन टुकड़ों में पड़ा त्रिशूल भगवान शिव का है, जिसके दर्शन के लिए तांता लगता है।